फतेहाबाद। जिले में पराली जलने से बढ़े प्रदूषण के चलते नगर परिषद ने शहर में निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है। अब कोई भी व्यक्ति 15 नवंबर तक कमान व अन्य निर्माण कार्य नहीं कर पाएगा। नगर परिषद ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का हवाला दिया है। इसके लिए नगर परिषद ने बकायदा शहर में मुनादी भी करवाई है। जिले में बुधवार को 14 स्थानों पर पराली में आग लगाने की लोकेशन आई है। वहीं फतेहाबाद में एक्यूआई का स्तर 451 रहा है, जिससे आंखों में जलन के साथ-साथ अब तो स्कूली बच्चों को अधिक परेशानी होने लगी है।
फतेहाबाद पिछले दो दिनों से प्रदेश में सबसे प्रदूषित जिला बना हुआ है, लेकिन फिर भी प्रदूषण रोकने की ओर कोई कारगर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हरसेक लगातार आग लगाने की लोकेशन कृषि विभाग को भेज रहा है। फतेहाबाद में बुधवार को भी 14 स्थानों पर पराली जलने की लोकेशन हरसेक ने कृषि विभाग को भेजी है। इनमें पांच-पांच रतिया और टोहाना तथा जाखल क्षेत्र से चार लोकेशन आई हैं। जिले में अब तक 338 फायर लोकेशन मिली है, जिनमें से 71 फेक पाई गई हैं। वहीं, 257 जगहों पर अब तक पराली को आग लगाई जा चुकी है। कृषि विभाग 171 किसानों को अब तक चार लाख 35 हजार रुपये का जुर्माना कर चुका है।
शहर में हो रहा 500 से ज्यादा भवनों का निर्माण
शहर फतेहाबाद की अगर बात करें तो यहां पर 500 से ज्यादा निर्माण कार्य हो रहे है। जिसमें मकान, प्रतिष्ठान आदि शामिल है। इसके अलावा नगर परिषद द्वारा भी सड़कों का निर्माण करवाया जा रहा है। यहां तक कि हुडा सेक्टर में 200 बेड के अस्पताल के भवन का भी निर्माण हो रहा है।
आज महेंद्रगढ़ जाएगा यूनियन का प्रतिनिधिमंडल
फतेहाबाद से पराली लेकर महेंद्रगढ़ जाने वाले किसानों की ट्रैक्टर-ट्राॅलियों के चालान काटने के मामले में पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल प्रदेशाध्यक्ष मनदीप नथवान के नेतृत्व में वीरवार को महेंद्रगढ़ जाएगा। प्रतिनिधिमंडल महेंद्रगढ़ के उपायुक्त से मिलकर उनके समक्ष किसानों की समस्या को रखेगा। साथ ही उपायुक्त से चालान नहीं काटने का आग्रह किया जाएगा।
समय पर बेलर न मिलने और गेहूं की बिजाई की जल्दबाजी में जला रहे पराली
फतेहाबाद में धान की कटाई के सीजन में किसानों को समय पर बेलर उपलब्ध नहीं हो पाए। 58 बेलर संचालक इस दौरान दूसरे जिलों में गए हुए थे, जिनको प्रशासन ने नोटिस भी जारी किया था। इस बीच गेहूं बिजाई का सीजन आ गया और किसानों ने फसली अवशेष जलाने शुरू कर दिए। वहीं जो किसान पराली प्रबंधन में जुटे हुए थे, वह महेंद्रगढ़ व चरखी दादरी में पराली बेचने के लिए पहुंचे तो उनके चालान काट दिए गए। जिस कारण पराली प्रबंधन में जुटे किसानों ने भी अपने हाथ खींच लिए। फतेहाबाद में जब बेलर उपलब्ध हुए तब तक देरी हो चुकी थी। किसानों ने पराली प्रबंधन को नकार दिया, क्योंकि उनको जल्द से जल्द गेहूं की बिजाई करनी थी। यही कारण है कि पराली जलाने में फतेहाबाद जिला प्रदेश में नंबर वन बना हुआ है।
कोट
शहर में बढ़ते हुए प्रदूषण को देखते हुए निर्माण कार्यों पर रोक लगाई गई है। कोई भी व्यक्ति 15 नवंबर तक निर्माण कार्य नहीं कर सकता है। कोई आदेशों की अवहेलना करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
-मुकेश शर्मा, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद
कोट
पराली जलाने से किसानों को रोकने के लिए कृषि विभाग की टीमें लगातार जागरूक कर रही हैं। कृषि यंत्र भी किसानों को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। प्रदूषण को कम करने के लिए शहर में पानी के छिड़काव से लेकर कंस्ट्रक्शन कार्यों पर रोक लगाने के फैसले लिए गए हैं।
-अजय सिंह तोमर, डीसी, फतेहाबाद
इस महीने अब तक आई फायर लोकेशन
1 नवंबर : 28
2 नवंबर : 10
3 नवंबर : 1
4 नवंबर : 14
5 नवंबर : 36
6 नवंबर : 21
7 नवंबर : 7
8 नवंबर : 14