फतेहाबाद/भूना/रतिया। जिला प्रशासन ने पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक सिर्फ जागरूकता एवं जुर्माने के सहारे सख्ती करने वाले जिला प्रशासन ने अब एकाएक बड़ा कदम उठाते हुए जिलेभर में तीन दर्जन किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवा दिए हैं। इन किसानों को अब जमानत करवानी पड़ सकती है। कृषि विभाग के अधिकारियों की शिकायत पर भूना, रतिया एवं फतेहाबाद के गांवों के लगभग 36 के करीब किसानों के खिलाफ भादंसं की धारा 188 के तहत केस दर्ज किया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से किसानों और किसान संगठनों में हड़कंप की स्थिति है।
कृषि विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन एवं रिसर्च सेंटर अर्थात हरसैक ने सैटेलाइट रिपोर्ट के आधार पर लगातार पराली जलाने वाले किसानों की सूचना एवं लोकेशन कृषि विभाग को भेज रहा है और इस बार कृषि विभाग ऐसे किसानों पर कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। मिली जानकारी के अनुसार कृषि विभाग ने इस बार अभी तक 86 किसानों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा जिले के विभिन्न पुलिस थानों को की है जिसमें से 36 के करीब किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है। बाकी किसानों पर भी आजकल में कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा हरसैक की ओर से कृषि विभाग को रिपोर्ट भेजना बदस्तूर जारी है जिसके चलते आगे जाकर ये आंकड़ा और बढ़ सकता है।
भूना के इन किसानों पर दर्ज हुआ है मुकदमा
भूना खंड कृषि अधिकारी महेंद्र सिंह, उमेद सिंह व देवेंद्र सिंह ने बताया कि उपायुक्त के आदेश के बाद ब्लॉक में कई टीमें गठित की गई हैं। जबकि फतेहाबाद जिला में 40 टीमें धान की पराली जलाने वाले लोगों पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने बताया कि गांव के नंबरदार व सरपंच तथा पटवारी को आग लगाने वाले व्यक्तियों की तुरंत सूचना देने के भी दिशा निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोग धान की पराली में आग लगाकर हाथों-हाथ ट्रैक्टर के रूटा वेटर से सबूत मिटाने के भी प्रयास कर रहे हैं। जिनकी भी पहचान की जा रही है। भूना में खंड कृषि अधिकारी ने अपने संबंधित एरिया में आग लगाने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करवाई है। इनमें सर्वाधिक आग लगाने वाले लोग दिगोह से पाए गए हैं। जिनमें कुलविंदर सिंह, रणजीत सिंह, निरंजन कौर, हरजिंदर कौर, अमरीक सिंह शामिल हैं। 32 कनाल में धान के अवशेष जलाए थे। भूना के लक्ष्मण दास, संदीप कुमार ,सीताराम, कर्म सिंह तथा गांव धौलू के सुरेश कुमार व छबीलदास ने धान की पराली को आग के हवाले वाले किया था। गांव ?ूल्ट के कृष्ण कुमार व माया देवी ने अपने खेत में धान की पराली जलाई थी। गांव बुवान के नरेश कुमार व राकेश कुमार तथा सेठ विजय कुमार, निहाल सिंह, बलविन्द्र कौर, प्रदीप कुमार, मुकेश कुमार तथा दिदार सिंह शामिल हैं। जांडली खुर्द के दिनेश कुमार व सांचला की मामकौरी के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
रतिया में इन किसानों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई
कृषि विभाग के अधिकारियों की शिकायत पर रतिया के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासन की पाबंदी के बावजूद भी किसानों द्वारा अपने खेतों में अवशेषों को आग लगाए जाने के मामले को लेकर अनेक किसानों के खिलाफ धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया है। रतिया कृषि अधिकारी द्वारा दी गई शिकायत में बताया गया कि 1 अक्तूबर 2019 से 5 दिसंबर तक क्षेत्र के खेतों में अवशेषों को आग लगाना पूर्ण रूप से प्रतिबंध है, लेकिन उनकी टीम द्वारा निरीक्षण किया गया तो 24 अक्तूबर को भरपूर क्षेत्र के अलावा हमजापुर क्षेत्र के अनेक किसानों द्वारा अपने खेतों के अवशेषों में आग लगाई हुई थी। उन्होंने बताया कि संबंधित किसानों ने आदेशों की उल्लंघना की है, जिसके चलते पुलिस ने भरपूर निवासी कौशल्या, कमल, विनोद, सुरेश, महेश, नरेश के अलावा उमेद सिंह, अमरदीप निवासी हमजापुर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसके अलावा फतेहाबाद सदर पुलिस ने भी सदर थाना क्षेत्र के गांव अयालकी निवासी गोपाल सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया है।
एक साल की कैद और जुर्माने का है प्रावधान
कृषि विभाग ने जिलेभर के किसानों के खिलाफ भादंसं की धारा 188 के तहत केस दर्ज करवाएं हैं। इस धारा के तहत आरोपी अगर दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें एक साल की सजा व जुर्माने की सजा सुनाई जा सकती है।
एनजीटी के आदेशों की उल्लंघना में ये है जुर्माने का प्रावधान
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के अनुसार पराली को आग लगाने से पर्यावरण दूषित होता है। जिससे जहरीला धुंआ मानव शरीर को नुक्सान पहुंचाता है। एनजीटी ने सरकार को आदेश दिए हैं कि 2 एकड़ पराली जलाने वाले किसान को 25 सौ रुपये, पांच एकड़ में 5 हजार एवं पांच एकड़ से अधिक जमीन में पराली जलाने पर प्रति घटना 15 हजार रुपये वसूल किए जाएं।
वर्जन
इस बार सरकार की ओर से पूरी सख्ती के आदेश हैं। जिलास्तर पर 20 टीमें बनाई गई हैं जिनमें एडीओ, ग्राम सचिव, पटवारी एवं पुलिस शामिल है। ये टीमें मौके पर ही दोषी किसानों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
- डॉ. बलवंत सिंह सहारण, कृषि उपनिदेशक फतेहाबाद