फतेहाबाद। नेशनल हाईवे के दूसरी तरफ खेतों और ढाणियों में जमा बाढ़ का पानी शहर की चिल्ली में निकालने के लिए सिंचाई विभाग ने पुलिस की मदद से बुधवार देर रात एक साइफन खोल दिया। इसके बाद माजरा रोड पर अंडरब्रिज के पास दूसरे साइफन को वीरवार सुबह खोल दिया गया। पानी को चिल्ली में बने तालाब में डालकर मोटरों के जरिये रंगोई नाले में डाला जाएगा। इसको लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ ट्रायल भी किया जो कि सफल रहा। साइफन से आ रहे पानी को जल्द चिल्ली में डालने के लिए दो जेसीबी भी लगाई गई है। शुक्रवार तक सिंचाई विभाग रतिया रोड दो और साइफन खोलने की तैयारी में है ताकि जल्द से जल्द पानी को चिल्ली में ले जाया जा सके। हालांकि बुधवार को साइफन खोलने का किसानों ने विरोध किया था। किसानों ने कहा था कि उनकी फसलें खराब हो जाएंगी। लेकिन रात को पुलिस की मदद से सिंचाई विभाग ने साइफन खोल दिया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाईवे किनारे, खेतों औ ढाणियों में जमा बाढ़ का तीन से चार दिन में निकल जाएगा। पानी खेतों में रोका नहीं जाएगा, साथ-साथ निकासी की जाएगी ताकि फसल खराब न हो सके।
शहर को बचाने के लिए बंद किए गए थे 20 से ज्यादा साइफन
हाईवे किनारे तक बाढ़ का पानी आने के बाद शहर को बचाने के लिए प्रशासन ने साइफन को पक्की चिनाई करवाकर बंद करवा दिया था। भूना रोड से लेकर रतिया रोड तक करीब 20 साइफन बंद किए गए थे। ये साइफन इसलिए बंद किए गए थे ताकि शहर को बचाया जा सके।
आठ फुट तक जमा हो गया था पानी
रंगोई नाला ओवरफ्लो होने के बाद खेतों और ढाणियों में करीब आठ फुट तक पानी जमा हो गया था। खान मोहम्मद के पास माइनर खोदकर पानी की निकासी शुरू की गई। इसके बाद पानी का स्तर कम हुआ। हालांकि अभी भी दो से ढाई फुट तक पानी जमा है।
शहर से बारिश पानी निकालने के लिए रंगोई नाले तक डाली गई है पाइप लाइन
शहर के धर्मशाला रोड, जवाहर चौक, तुलसीदास चौक, डीएसपी रोड, भीमां बस्ती क्षेत्र के बारिश पानी को निकालने के लिए चिल्ली में डिस्पोजल टैंक बनाया गया है। डिस्पोजल टैंक से रंगोई नाले तक पाइप लाइन बिछाई गई है। इस प्रोजेक्ट पर करीब आठ करोड़ खर्च हो चुका है।
कोट
खेतों में अभी भी दो से ढाई फुट तक बाढ़ का पानी जमा है। पानी को चिल्ली में डाला जा रहा है। चिल्ली में मोटरों के जरिये रंगोई नाले में डाला जाएगा। किसी भी फसल को खराब नहीं होने दिया जाएगा।
-ओपी बिश्नोई, एसई, सिंचाई विभाग