स्वतंत्रता सेनानी पोकर मांझू का परपोता विनोद व उसकी माता, प्राप्त ताम्रपत्र के साथ। स्रोत: स्वय
फतेहाबाद। गांव धांगड़ को स्वतंत्रता सेनानियों का गांव माना जाता है। यहां के 14 सपूत स्वतंत्रता संग्राम में सीधे जुड़े हुए थे। इन्हीं में से एक थे स्वतंत्रता सेनानी पोकर मांझू। आजादी की लड़ाई में दिए गए उनके योगदान को देखते हुए गांव धांगड़ के गौरव पट्ट पर उनका नाम अंकित किया गया है। मांझू का जन्म साल 1915 के आसपास हुआ था। उनके परपौत्र विनोद मांझू बताते हैं कि 1942 में शुरू हुए भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान दादा पोकर मांझू ने अंग्रेजों को काले झंडे दिखाए थे। देश की स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान उनको हिसार से गिरफ्तार करके लाहौर जेल में 5 महीने 25 दिन रखा गया था।
दो बार ताम्रपत्र व पांच सितारों से हो चुके हैं सम्मानित : स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी को देखते हुए उनको जीवनकाल दो बार ताम्रपत्र से सम्मानित किया गया था। पहली बार उनको आजादी के पच्चीस वर्ष पूरे होने पर तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने ताम्रपत्र दिया था। दूसरी बार हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसी लाल ने नेता जी सुभाषचंद्र बोस की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था।
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स्वतंत्रता सेनानी पोकर मांझू के दो बेटे व एक बेटी थी
स्वतंत्रता सेनानी पोकर मांझू के दो बेटे व एक बेटी थी। जिनमें से सबसे बड़ा बेटा जोतराम व छोटा बेटा भागीरथ और सबसे छोटी बेटी शांति देवी थी। इनमें से अभी कोई भी जीवित नहीं हैं। मांझू के परपोता ने बताया कि उनके गांव धांगड़ से 14 स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके नाम से सार्वजनिक भवन या स्थान का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि आने वाली पीढि़यों को उनके योगदान के बारे में स्मरण रहे।