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गंदा गांव: 50 बच्चों ने पत्र भेजा तब पसीजा पीएमओ का दिल

Thu, 30 Jun 2016 12:47 AM IST
fatehabad
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गंदा गांव के स्कूल एवं पशु चिकित्सालय की पिछली साइड, जहां चारदीवारी की मांग उन्होंने रखी है। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमित रूखाया । पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यालय से गांव गंदा की समस्याओं के समाधान के निर्देश के पीछे महज हरप्रीत कौर की एक चठ्ठी नहीं है। गांव के तकरीबन स्कूल के प्रिंसिपल जयपाल की मानें तो 50 बच्चों ने पीएम को खत लिखकर अपने गांव एवं स्कूल की समस्या का जिक्र किया है। इन 50 बच्चों में से महज दो बच्चों हरप्रीत एवं प्रदीप के पत्रों का जवाब पीएमओ से आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दफ्तर से गंदा गांव की समस्याओं को दूर करने का निर्देेश आते ही रतिया ब्लॉक का ये छोटा सा गांव अचानक ही सुर्खियों में आ गया है।
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सातवीं कक्षा की छात्रा हरप्रीत द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में गांव की जिन समस्याओं का जिक्र किया गया है, उसकी पड़ताल करने अमर उजाला की टीम बुधवार सुबह ही जिला मुख्यालय से तकरीबन 25 किलोमीटर दूर गांव गंदा पहुंची और ग्राउंड जीरो पर जाकर हालात का जायजा लिया।

हरप्रीत के स्कूल की चारदीवारी नहीं, कमरे भी कंडम
पीएम मोदी को पत्र लिखकर अपने स्कूल की चारदीवारी बनवाने का आग्रह करने वाली हरप्रीत कौर का स्कूल राजकीय माध्यमिक विद्यालय गंदा वास्तव में चारदीवारी की कमी और आवारा पशुओं की समस्या से जूझ रहा है। स्कूल में आगे की तरफ से तो पक्की दीवार है, लेकिन स्कूल के पीछे की तरफ कोई चारदीवारी नहीं है। इसके चलते आसपास के इलाकों से आवारा पशु स्कूल के अंदर तक घुस जाते हैं। इसके अलावा बारिश के दिनों में स्कूल के पीछे जाना मुमकिन ही नहीं हो पाता। इसी स्कूल के साथ लगते पशु चिकित्सालय भी चारदीवारी की कमी झेल रहा है।
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इसके अलावा चारदीवारी न होने के कारण कई बार छोटे बच्चे अध्यापकों से बचकर पिछली साइड से स्कूल से बंक कर गांव से गुजर रही नहर के ऊपर बनी पाइपों पर चढ़कर बाहर निकलने का प्रयास करते हैं। ये सच में खतरनाक है। एक  छोटा बच्चा इन पाइपों से फिसल कर नहर में गिर चुका है, लेकिन उसे समय रहते बचा लिया गया था। ऐसे में इस स्कूल और पशु चिकित्सालय के पीछे चारदीवारी का होना आवश्यक है।
 
गांव को अजीतसर बुलाते हैं ग्रामीण, गंदा लगाना मजबूरी
यहां के ग्रामीण अपने गांव के नाम को कितना नापसंद करते हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अपने गांव का नाम गंदा बताने की बजाए अजीतसर कहते हैं। हालांकि सरकारी कागजों में गंदा नाम लिखा होने के कारण उन्हें भी मजबूरी में अजीतसर के साथ गंदा भी लिखना पड़ता है। बीते दिनों संपन्न हुए चुनावों के पोस्टरों पर भी प्रत्याशियों ने गांव का नाम अजीतसर ही लिखा था।

स्कूल के लिए मांगी चारदीवारी, खुद का घर बिना चारदीवारी
कहते हैं बच्चे मन के सच्चे होते हैं। ये कहावत पीएम मोदी को पत्र लिखने वाली हरप्रीत कौर पर सटीक बैठती है। पीएम को लिखे पत्र में हरप्रीत ने बड़े हक से प्रधानमंत्री से उसके स्कूल और पशु चिकित्सालय की चारदीवारी बनाने की मांग रखी। आपको बता दें कि हरप्रीत के खुद के घर में चारदीवारी नहीं है।

पिता गुरजीत सिंह खेत मजदूर हैं। दो कच्चे कमरे हैं, जिसमें हरप्रीत सहित चार भाई-बहन और उसके माता-पिता रहते हैं, तो दूसरे में उनके घर के मवेशी रहते हैं। माता-पिता दोनों के काम पर जाने पर कभी हरप्रीत तो कभी बहन मनप्रीत कौर चूल्हे पर खाना बनाती हैं। एलपीजी नहीं है हरप्रीत के घर। घर में शौचालय बना है। वह साफ कहती है कि खुले में शौच जाना पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है।


इतना आसान नहीं सरकारी रिकार्ड में गांव का नाम बदलना
प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो जिला उपायुक्त या रतिया प्रशासन के बस में नहीं है कि वो गंदा गांव का नाम बदलकर कुछ और करवा दें। इसके लिए बाकायदा मंत्रिमंडल की बैठक में ही कुछ फैसला हो सकता है। ऐसे में रतिया एसडीएम पूजा चौवरिया ने गांव की पंचायत से कहा है कि वो इस मामले में एक नया प्रस्ताव दें, जिसे एडीसी को भिजवाया जाएगा। एडीसी कार्यालय ही इस मामले में प्रदेश सरकार से पत्राचार करेगा। ऐसे में संभव है कि गंदा गांव के ग्रामीणों को अपने औपचारिक नए नाम के लिए और इंतजार करना पड़े।  


गांव का नाम बदलना जिला या रतिया प्रशासन के हाथ में नहीं है। हमने गांव की पंचायत से कहा है कि वो अपना नया प्रस्ताव दें। उस नए प्रस्ताव को एडीसी के मार्फत प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। गांव का नाम बदलने का काम प्रदेश सरकार ही कर सकती है।
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पूजा चौवरिया, एसडीएम, रतिया।

 
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