फतेहाबाद। जिले की अनाज मंडियों में बाजरे की आवक शुरू होते ही किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। निजी स्तर पर बाजरा 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीदा जा रहा है जबकि सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
इस तरह किसानों को प्रति क्विंटल करीब 700 से 900 रुपये तक कम दाम मिल रहे हैं। किसानों ने प्रशासन और प्रदेश सरकार से एमएसपी पर सरकारी खरीद जल्द शुरू करने की मांग की है।
किसान रायसिंह, विष्णु और रामप्रताप ने बताया कि जिले की अनाज मंडियों में बाजरे की सरकारी खरीद नहीं होती। इसके चलते हर साल उन्हें मजबूरी में निजी व्यापारियों को फसल बेचनी पड़ती है। किसानों का कहना है कि यदि इस बार भी एमएसपी पर खरीद की व्यवस्था नहीं की गई तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने खरीद प्रक्रिया समय पर शुरू करने की मांग की है।
किसानों ने 15 सितंबर से बाजरे की सरकारी भाव पर खरीद शुरू करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि फसल तैयार होने के बाद मंडियों में आवक बढ़ेगी। ऐसे में खरीद केंद्रों पर सरकारी व्यवस्था नहीं होने से किसानों को उपज निजी हाथों में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। किसानों ने कहा कि 15 सितंबर से एमएसपी के तहत खरीद शुरू होने से उन्हें बाजार भाव में संभावित गिरावट का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
पांच हजार एकड़ में हुई बाजरे की खेती :
इस बार जिले में करीब पांच हजार एकड़ क्षेत्र में बाजरे की खेती की गई है। किसानों को उम्मीद थी कि सरकार द्वारा तय एमएसपी के अनुसार उन्हें उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। मौजूदा बाजार भाव ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। किसानों के अनुसार बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एमएसपी से काफी कम कीमत पर फसल बेचने से लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
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शहर की अनाज मंडी में बाजरे की आवक बहुत कम होती है ऐसे में यहां खरीद एजेंसियां खरीद करने नहीं पहुंचती। बाजरा की निजी खरीद जारी है। फिलहाल सरकारी खरीद को लेकर कोई आदेश नहीं मिले नहीं है।
अमित रोहिल्ला, सचिव मार्केट कमेटी, फतेहाबाद।