फतेहाबाद। हरियाणा में सरकारी नौकरियों की ओर युवाओं की बढ़ती रुचि, विशेषकर हरियाणा रोडवेज में परिचालक के पद पर नौकरी पाने की उम्मीद ने जिला रेडक्रॉस कार्यालय में हलचल बढ़ा दी है। परिचालक लाइसेंस के लिए अनिवार्य प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं की संख्या में भारी उछाल देखने को मिला है।
जिला रेडक्रॉस विभाग के आंकड़े बताते हैं कि परिचालक लाइसेंस बनाने के लिए युवाओं की ओर से लगातार आवेदन किए जा रहे हैं। इस बढ़ते रुझान के पीछे का सबसे बड़ा कारण हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी) है। सीईटी परीक्षा पास करने वाले युवाओं का मानना है कि भविष्य में जब भी हरियाणा रोडवेज में परिचालकों के पदों पर भर्ती निकलेगी, तो उनके पास पहले से ही वैध लाइसेंस होना अनिवार्य होगा।
इसी सोच के तहत जिले के युवा रेडक्रॉस कार्यालय में परिचालक लाइसेंस बनाने के लिए जरूरी सीनियर प्रोफेशनल कोर्स के लिए आवेदन कर रहे हैं। दिसंबर 2025 में करीब 900 आवेदन आए थे, वहीं जनवरी 2026 में अब तक करीब 300 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।
जिला रेडक्रॉस कार्यालय में इस ट्रेनिंग को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है। कार्यालय के नियमों के अनुसार, सही गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण को सुनिश्चित करने के लिए एक बैच में केवल 30 बच्चों को ही शामिल किया जाता है। इनको करीब 7 दिन का प्रशिक्षण दिया जाता है और 8 वें दिन इस प्रशिक्षण की परीक्षा होती है।
जिला रेडक्रॉस कार्यालय के जिला प्रशिक्षण अधिकारी दलबीर सिंह ने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर में युवाओं को आपातकालीन स्थिति में प्राथमिक उपचार, पट्टियां बांधना, सीपीआर देना और सड़क दुर्घटना के समय घायल की जान बचाने के महत्वपूर्ण गुर सिखाए जाते हैं। फर्स्ट एड सर्टिफिकेट सबसे प्राथमिक और अनिवार्य दस्तावेज है, जिसे रोडवेज में परिचालक के पद पर नौकरी पाने के लिए जरूरी माना जाता है। संवाद