कुलां। गत दिनों क्षेत्र में आई बाढ़ के कहर से हुईं क्षति से अभी अन्नदाता उभरे भी नहीं है कि अब धान उत्पादक किसानों के समक्ष नई समस्या खड़ी हो गई है। दरअसल कुलां देहात क्षेत्र में खेतों में खड़ी धान की फसल पत्ता लपेट सुंडी की चपेट में आ रही है। सुंडी के कारण धान के हरे खेत सफेद होने लग गए हैं। इससे किसानों के चेहरे पर चिंता छा गई है। सुंडी धान के पत्तों को खा रही है। इससे पत्ते सूख रहे हैं। बारिश की कमी के कारण पत्ता लपेट सुंडी की बीमारी धान की फसल में आई है। यदि फसल को समय रहते बीमारी से न बचाया गया तो यह पूरे धान के खेत को चट कर जाएगी, जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक पत्ता लपेट सुंडी का खतरा अगस्त व सितंबर माह में रहता है, क्योंकि इन महीनों में दिन के समय गर्मी अधिक पड़ने से धान की गोभ में सुंडी उत्पन्न हो जाती है। ये गोभ में अंडे देती है और फिर धीरे-धीरे सुंडी पूरे पौधे को खाने लग जाती है। सुंडी तने में छेद कर देती है। इससे पौधे सूखने लग जाते हैं। ऐसे में समय रहते कीटनाशक दवा के छिड़काव से बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। कृषि अधिकारियों के अनुसार यदि धान में तना छेदक रोग भी लगा है तो 5 किलोग्राम कारटाप हाईड्रोक्लोराइड दवाई खेत में डालें जो तना छेदक और पत्ती लपेटा कीट दोनों को खत्म कर देती हैं।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह, यह करें उपाय
टोहाना कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी मुकेश महला ने किसानों को परामर्श दिया कि खड़ी धान फसल में सुंडी पत्ता लपेट की दस्तक होने पर किसान फसल में मोनोक्रोटोफास का स्प्रे करें। 200 से 250 लीटर पानी में 500 ग्राम मोनोक्रोटोफास डालकर एक एकड़ में स्प्रे करें तो इसके छिड़काव से पत्ता लपेट सुंडी मर जाएगी। पत्ता लपेट सुंडी के खात्मे के लिए किसान देशी उपाय भी कर सकते हैं। इसके लिए एक लंबी रस्सी लेकर उसमें 2-3 जगह पत्थर बांध दें और 2 व्यक्ति उसे धान के खेत में एक छोर से दूसरे छोर तक घुमाएं। ऐसा करने से सुंडी पत्तों से झड़कर पानी में गिरकर मर जाएगी। यदि आगामी दिन में अच्छी वर्षा हो जाती है तो इस बीमारी का खतरा टल जाएगा।