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Fatehabad News: जिले से सिर्फ एक बार स्वतंत्र बाला चौधरी ही बन सकीं महिला विधायक

Wed, 18 Sep 2024 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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स्वतंत्र बाला चौधरी।
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फतेहाबाद। बेशक आधी आबादी चुनाव में नेताओं को सत्ता में लाने में अपनी अहम भूमिका निभाती है। मगर जिले के 27 सालों के इतिहास में मात्र एक महिला को विधानसभा पहुंचने का अवसर मिला है। सिर्फ फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व ही एक बार महिला कर पाई है।
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साल 2002 में पूर्व पर्यटन मंत्री लीलाकृष्ण चौधरी के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पुत्रवधू स्वतंत्र बाला चौधरी को फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र का विधायक बनने का गौरव हासिल हुआ था। लीलाकृष्ण चौधरी साल 2000 में हुए आम चुनाव में इनेलो के टिकट पर जीते थे। साल 2002 में उनका निधन हो गया था। इसके बाद साल 2003 में उपचुनाव हुआ तो इनेलो ने उनकी पुत्रवधू स्वतंत्र बाला को टिकट देकर मैदान में उतारा। वह कांग्रेस प्रत्याशी दुड़ाराम को सात हजार से अधिक मतों से हराकर विधायक बनीं। हालांकि, उसके बाद स्वतंत्र बाला चौधरी ने तीन चुनाव और लड़े। मगर उन्हें दूसरी बार विधायक बनने का मौका नहीं मिला। विशेष बात यह है कि टोहाना और रतिया विधानसभा क्षेत्र से तो कोई महिला विधायक नहीं बन पाई है।


प्रिंसिपल की नौकरी छोड़कर बनी विधायक
स्वतंत्र बाला चौधरी के विधायक बनने की कहानी भी रोचक है। उनके ससुर लीलाकृष्ण के निधन के बाद इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने परिवार के ही किसी सदस्य को टिकट देने की इच्छा जाहिर की। सियासी मंथन के बाद स्व. लीलाकृष्ण के बड़े बेटे बैंक मैनेजर नरेंद्र चौधरी की पत्नी स्वतंत्र बाला चौधरी को मैदान में उतारने का ऐलान कर दिया। इसके बाद स्वतंत्र बाला चौधरी ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय फतेहाबाद के प्रिंसिपल पद की सरकारी नौकरी छोड़कर नामांकन दाखिल किया।
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विधायक बनने के बाद तीन चुनाव और लड़ी, लेकिन जीत नहीं मिली

2003 के बाद साल 2005 के आम चुनाव में भी इनेलो ने स्वतंत्र बाला चौधरी को ही मैदान में उतारा। इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस के दुड़ाराम से हुआ। इस मुकाबले में दुड़ाराम ने स्वतंत्र बाला चौधरी को 10,625 वोटों से हराया। फिर साल 2009 में तीसरी बार इनेलो ने स्वतंत्र बाला को टिकट थमाया। इस बार भी उन्हें जीत नहीं मिल सकी। तीसरे चुनाव में वह तीसरे नंबर पर रही, इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा ने जीत हासिल की। साल 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले स्वतंत्र बाला चौधरी भाजपा में शामिल हो गईं। इसके बाद भाजपा ने भी स्वतंत्र बाला को उम्मीदवार बनाया। मगर उनको चौथे चुनाव में भी जीत नहीं मिल पाई। इस बार इनेलो के बलवान दौलतपुरिया विधायक बन गए। स्वतंत्र बाला को तीसरा स्थान मिल पाया।
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57 साल में चार महिलाओं ने ही चुनाव लड़ा, एक जीत पाई
साल 1967 से लेकर अब तक 57 सालों में चार महिलाओं ने ही फतेहाबाद विधायक क्षेत्र से चुनाव लड़ा है। साल 2000 में हरियाणा विकास पार्टी से दयावंती वर्मा और साल 2005 में दुर्गेश अरोड़ा भाजपा से उम्मीदवार बनीं। मगर दयावंती वर्मा 1568 वोट लेकर पांचवें नंबर पर रहीं जबकि दुर्गेश अरोड़ा 3147 वोट लेकर चौथे स्थान पर रही थीं। साल 2019 में इनेलो ने भी एडवोकेट सुमनलता सिवाच को मैदान में उतारा था। मगर सुमनलता 2111 वोट लेकर छठे स्थान पर रही थीं।
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