फतेहाबाद। दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की घोषणा महज 300 गज के टुकड़े के कारण सिरे नहीं चढ़ पाई है। फतेहाबाद शहर में चिल्ली झील को पर्यटन स्थल बनाने का सपना अभी तक साकार नहीं हो सका है। 12 साल से अधिक समय बीत चुका है।
इस अवधि में अधिकारियों और ठेकेदारों ने जरूर चांदी कूटी, लेकिन पर्यटन के नाम पर यहां कुछ नहीं बन पाया है। करोड़ों रुपये भी खर्च हो चुके हैं, लेकिन हालात पहले जैसे ही है। बस वहां एक बारिश के पानी की निकासी के लिए तीस हजार लीटर की क्षमता के टैंक बने हुए हैं। इन टैंकों में शहर का बारिश का पानी इकट्ठा करके मोटर से रंगोई नाले में डाला जाता है।
करोड़ों रुपये से चिल्ली झील को नया रूप देने के लिए वहां पर काफी समय से जमा मिट्टी की गाद को बाहर निकाला गया, लेकिन काफी समय से काम बंद होने और खोदी गई जगह में फिर से पानी भरने के कारण जो काम हुआ था, उस पर भी पानी फिर गया है। पानी जमा होने से यहां पर जलकुंभी उग गई है। जो काम पहले नगर परिषद ने करोड़ों रुपये देकर करवाया था, वह काम फिर से करवाना पड़ेगा।
गौरतलब है कि फतेहाबाद में प्राकृतिक चिल्ली झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा साल 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने की थी। पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए 10 करोड़ रुपये भी जारी किए गए। इसके बाद भाजपा सरकार आने पर साल 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी यही घोषणा की। मगर अधिकारियों के सुस्त रवैये के कारण आज भी शहरवासी पर्यटन स्थल विकसित होने का इंतजार कर रहे हैं।
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घग्गर का पानी पहुंचता है चिल्ली झील
घग्गर नदी बारिश के पानी की नदी के रूप में जानी जाती है। यहां दशकों पूर्व जाखल के चांदपुरा साइफन से गांव अयाल्की होते हुए बारिश का पानी शहर के मुहाने पर स्थित चिल्ली झील में आकर ठहरता था। जिस कारण शहर में बाढ़ का खतरा टलता रहा। समय बीता, लोगों ने घग्गर नदी व चिल्ली झील की जमीन पर कब्जे कर लिए और उसके बाद लगातार यहां बाढ़ आने लगी। पिछले तीन दशकों में बाढ़ का पानी 10 बार शहर तक पहुंचा तो चिल्ली ने इसे अपनी ओट में रोके रखा। इन तीन दशकों के बाद चिल्ली पर कब्जे ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि प्रशासन की नाक के नीचे चिल्ली झील की जगह काॅलोनी बस गई। अब हालात यह है कि कभी सैकड़ों एकड़ में फैली चिल्ली झील कुछ कनाल तक सिमट गई। वह भी कभी सरकार तो कभी कोर्ट के चक्कर में फाइलें अधिकारियों की मेजों पर धूल फांकती रही। अनेक जिलाधिकारी आए और गए, सरकार ने भी करोड़ों रुपए भेजे लेकिन चिल्ली की जगह पर एक ईंट भी नहीं लगी।
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300 गज का टुकड़ा सौंदर्यीकरण में बन रहा था बाधा
अधिकारियों के अनुसार चिल्ली झील की 300 गज भूमि का एक टुकड़ा इसके सौंदर्यकरण में आड़े आ रहा था। हालांकि इसकी निशानदेही हो चुकी है। भूमि मालिक से जमीन खरीदने की बात चल रही है। जल्द ही जमीन लेकर चिल्ली का जीर्णोद्धार हो जाएगा। इसको लेकर मामला कोर्ट में चला गया था, जिस कारण छह महीने काम नहीं कर सके। चिल्ली झील व पार्क को जोड़ने के लिए चारों तरफ ट्रैक बनाया जाएगा। निशानदेही में जो कब्जे सामने आएंगे, वो हटवाए जाएंगे और ट्रैक के चारों तरफ पेड़ पौधे लगाकर सुंदर पर्यटन स्थल बनाया जाएगा।
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काफी वर्षों से हम सुन रहे हैं कि चिल्ली झील पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगी, लेकिन आज तक नहीं हुई है। जब तक चिल्ली झील पर किए हुए कब्जे नहीं हटेंगे तब तक विकास नहीं हो पाएगा।
- रमेश सचदेवा, निवासी, फतेहाबाद
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यहां पर चिल्ली झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए घोषणा की थी। फिर पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी घोषणा की। वह दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने लेकिन आज तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।
- सीताराम सोनी, निवासी, फतेहाबाद
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चिल्ली झील का विकास न होना अधिकारियों की सबसे बड़ी लापरवाही है क्योंकि मंत्रियों के द्वारा घोषणा की जाती है और खर्च करने के लिए राशि जारी की जाती है। मगर काम तो अधिकारियों को करवाना होता है। नगर परिषद के अधिकारी काम करवाने में सफल नहीं हो पाए।
- तरुण रुखाया, निवासी, फतेहाबाद
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मानसून के समय जब भी बारिश आती थी, तो सारा पानी चिल्ली झील के अंदर समा जाता था। जब से अधिकारियों ने चिल्ली झील के विकास के लिए काम शुरू किया है, तब से आज तक लोगों को जल निकासी की भी दिक्कत आ रही है।
सोम चावला, निवासी, फतेहाबाद