फतेहाबाद। बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने के लिए कंडम बसों का इस्तेमाल हो रहा है लेकिन प्रशासन चैन की नींद सो रहा है। सड़क सुरक्षा सप्ताह के नाम पर प्रशासन सिर्फ औपचारिकताएं पूरी कर रहा है। एक साल से शिक्षा विभाग, आरटीए और ट्रैफिक पुलिस ने फतेहाबाद की सड़कों पर दौड़ रही स्कूल बसों की जांच ही नहीं की है। जबकि सड़क पर कंडम स्कूल बसें धड़ल्ले दौड़ रही हैं, यहां तक इन बसों को ऐसे ड्राइवर चला रहे हैं जो कि अप्रशिक्षित हैं। इसका खुलासा दो साल पहले हुई जांच के दौरान हो चुका है। लेकिन इसके बावजूद प्रशासन स्कूल बसों के प्रति नरमी बरत रहा है।
फतेहाबाद में इस सप्ताह में स्कूल बसों के कारण तीन हादसे भी हो गए हैं। चार दिन पहले रतिया के पास एक हादसे में बस पलट गई और 22 बच्चे बाल-बाल बचे। बस के हादसे का कारण तकनीकी कमी बताई जा रही है। हांसपुर रोड पर हुए दूसरे हादसे में तेज गति होने के कारण बस अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराने से बच गई। बुधवार सुबह भी गांव बीसला के पास एक निजी स्कूल की बस ने कार में टक्कर मार दी। इस हादसे में बस स्टैंड पर खड़ा एक युवक घायल हो गया। बताया गया है कि उक्त स्कूल बस को एक नाबालिग ड्राइवर चला रहा था।
रतिया में 13 और टोहाना में 20 बसों में मिलीं खामियां
आरटीए कार्यालय के अधिकारी खुद मान रहे हैं कि फतेहाबाद में बसों की जांच नहीं हुई है जबकि रतिया और टोहाना में जांच हुई है। रतिया में 40 बसों की जांच में 13 बसों में खामियां पाई गई तो टोहाना में 80 बसों की जांच में 20 बसों में खामियां पाई गई हैं।
कौन करे जांच, जिले में एमवीआई नहीं
आरटीए कार्यालय में मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर ही नहीं है। अधिकारी खुद कह रहे हैं कि बसों की जांच करने के लिए एमवीआई ही नहीं है। गाड़ियों की पासिंग करवाने के लिए एक एमवीआई एक दिन के लिए चंडीगढ़ से फतेहाबाद आता है। अब उस दिन गाड़ियों की पासिंग का इतना प्रेशर होता है कि गाड़ियों की जांच पड़ताल का समय ही नहीं मिल पाता।
जिले में प्राइवेट स्कूल बसों की स्थिति
प्राइवेट स्कूल : 175
स्कूल बस : 1410
स्कूल बसों में ये नियम जरूरी
हाईकोर्ट के आदेश पर स्कूल बसों में 22 नियम है, जिन्हें अपनाना जरूरी है। जिसमें मुख्य तौर पर स्कूल बस में महिला सहायक, सीसीटीवी कैमरे, फायर सेफ्टी यंत्र, फर्स्ट एड किट, स्पीड गर्वनर, जीपीएस, बस का कलर पीला, वाहन पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर, वाहन पर स्कूल का नाम, स्कूल बस के मालिक का नाम और फोन नंबर, ड्राइवर को पांच साल का अनुभव, ड्राइवर का मेडिकल फिट होना आदि शामिल हैं।
वर्जन
स्कूल बसों की सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान जांच की गई थी। समय-समय पर की जाती है और स्कूलों को चेतावनी दी जा रही है। अगर फिर भी कहीं कमी है तो चेकिंग की जाएगी।
- महाबीर प्रसाद, अतिरिक्त उपायुक्त