हर साल स्वच्छता रैंकिंग का समय नजदीक आते ही नगर परिषद प्रशासन भले ही एकाएक युद्धस्तर पर सफाई अभियान शुरू कर देता है लेकिन रैंकिंग का समय निकलते ही शहर की सफाई व्यवस्था अपनी पुरानी बदहाल स्थिति पर आ जाती है। पिछले डेढ़ माह से चुनाव आचार संहिता की आड़ में नप प्रशासन विकास कार्यों की फाइलें दबाकर बैठा हुआ था लेकिन अब स्वच्छता की ओर ध्यान नहीं दिया तो हालात और बदतर हो सकते हैं। हमेशा संसाधनों की कमी का रोना भी नहीं चलेगा क्योंकि संसाधन बढ़ाने के नाम पर नगर परिषद प्रशासन ने भले ही एक साल पहले 13 टाटा ऐस गाड़ियां खरीदी जो लोगों के घरों से सीधा कचरा एकत्रित कर लेती हैं लेकिन इसके बावजूद शहर में स्वच्छता के मामले में नप प्रशासन पिछड़ता ही नजर आ रहा है। इतना ही नहीं, शहर में दुकानदारों के विरोध के बावजूद लगाए कूड़ेदान भी बेअसर साबित हुए हैं। कचरा इन कूड़ेदानों से बाहर ही पड़ा रहता है।
मोबाइल शौचालय पानी के अभाव में हुए बंद
शहर को खुले में शौच मुक्त करने के लिए प्रशासन की अगुवाई में नगर परिषद ने अभियान चलाया था। शहर की बस्तियों, खासकर झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को खुले में शौच के लिए न जाना पड़े इसके लिए शहर भर में तकरीबन 8 जगह मोबाइल शौचालय की व्यवस्था की गई थी। लेकिन ओडीएफ का तमगा मिलते ही नगर परिषद प्रशासन मानों इन मोबाइल शौचालयों को भूल ही गया है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि माजरा रोड, भूना रोड, अशोक नगर, लघु सचिवालय के सामने खाली मैदान आदि जगहों पर रखे गए ये मोबाइल शौचालय पानी के अभाव में बंद हो चुके हैं और लोग फिर से खुले में शौच के लिए जाने पर मजबूर हो चुके हैं।
गीले-सूखे कचरे को अलग करने की व्यवस्था नहीं
नगर परिषद प्रशासन ने लाखों रुपये खर्च कर शहर के कचरे को उठाने के लिए 13 टाटा एस गाड़ियां तो खरीद ली लेकिन इन्हें बिना तैयारी के ही सड़कों पर उतार दिया है। इन टाटा एस गाड़ियों में गीले-सूखे कचरे को अलग-अलग करने की कोई व्यवस्था नहीं है। कुछ दिन तक नप कर्मचारी इस टाटा एस में कचरे को अलग-अलग गिरवाने का प्रयास करते जरूर दिखे थे लेकिन अब वो भी नहीं दिखते। इसके चलते सभी प्रकार का कचरा टाटा एस में इकट्ठा हो जाता है और इस सारे कचरे को एक साथ ही बीघड़ रोड पर डीएवी स्कूल के पीछे स्थित डंपिंग जोन में डाल दिया जाता है। हालांकि अब डंपिंग जोन में अलग-अलग तरीके से कंपोस्ट खाद बनाने की तैयारियां शुरू हो चुकी है।
पिछले दस साल में आधे हुए नियमित सफाईकर्मी, ठेके वालों की संख्या भी आधे से कम
फतेहाबाद नगर परिषद के पास ये है सफाई के लिए संसाधन
आवश्यकता है वास्तव में हैं
5 ट्रैक्टर-ट्रॉली 2 ट्रैक्टर-ट्रॉली
40 रिक्शा 25 रिक्शा
35 हाथ रेहड़ी 20 हाथ रेहड़ी
20 टाटा ऐस बंपर 13 टाटा ऐस
शहर की आबादी के लिहाज से ये होने चाहिए सफाई कर्मी
कर्मचारियों की आवश्यकता वास्तव में कितने कर्मचारी
120 नियमित कर्मचारी 48 नियमित कर्मचारी
170 ठेकेदार कर्मचारी 122 ठेकेदार कर्मचारी
‘शहर के अंदर सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए नप प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। संसाधनों की कमी है लेकिन पिछले कुछ समय में हमने 13 नए टाटा एस व अन्य संसाधन खरीदे हैं, इससे सफाई व्यवस्था में और सुधार होगा। आगे भी नगर परिषद की बैठक में प्रस्ताव लेकर संसाधनों व कर्मचारियों की कमी को दूर करने का प्रयास करेंगे।’ -दर्शन नागपाल, नगर परिषद अध्यक्ष, फतेहाबाद ।