परमाणु संयंत्र से ऊर्जा के साथ फ्री में कैंसर भी मिलेगी। देश में जब यूरेनियम ही नहीं है, तो परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करने का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता। परमाणु ऊर्जा से देश को किसी भी प्रकार का फायदा नहीं होगा, बल्कि जनता के रुपये की बर्बादी होगी। इतना ही उन्हीं के रुपये बर्बाद करने के बाद उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ होगा। वो भी सदियों तक।
यह बात परमाणु संयंत्र विरोधी मोर्चा के सेमिनार में बोलते हुए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सौम्य दत्त ने कही। उन्होंने कहा कि वे ऊर्जा उत्पन्न करने के विरोध में नहीं है, बल्कि परमाणु संयंत्र से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि भारत के राजनेताओं ने फ्रांस में हुए अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन में विश्व को बताया था कि उन्होंने नई ऊर्जा नीति बनाई है।
इसके तहत अक्षय ऊर्जा से अगले छह वर्षों में एक लाख 76 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। इस दौरान डॉ. केएन रामचंद्र ने भी लोगों को संबोधित किया। वहीं सेमिनार की अध्यक्षता मोर्चा के हरियाणा प्रभारी सुभाष पुनिया ने की। मंच संचालन मोर्चा की महिला संयोजक विधा रत्ती ने किया। सुनील पुनिया, सुनील ढ़ाका, प्रदीप चौधरी, डॉ. राजेंद्र शर्मा, संतराम नंबरदार, महेंद्र सोनी, राकेश कंबोज, प्रवीन नारंग, चिरंगी लाल बुरा, कामरेड कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया, पिरथी जांगड़ा, मनदीप रतिया, तेजिंद्र सिंह और गोविंद शर्मा सहित अनेक लोग मौजूद रहे।