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जिले के पांच नगर निकायों में कुल 93 पार्षद, स्वच्छता अवार्ड के लिए एक भी आवेदन नहीं

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शहर में लगे गंदगी के ढेर। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। वार्ड के विकास को लेकर खुद पार्षद ही गंभीर नहीं हैं। पिछले डेढ़ साल से चल रही स्वच्छता प्रतियोगिता में फतेहाबाद जिले के एक भी पार्षद ने अपने वार्ड का आवेदन तक नहीं किया जबकि स्वच्छता प्रतियोगिता में प्रति माह सबसे स्वच्छ वार्ड को एक लाख रुपये की ग्रांट मिलनी तय थी। फतेहाबाद जिले में दो नगर परिषद व तीन नगर पालिकाओं सहित कुल पांच नगर निकाय संस्थाएं हैं। जिसमें कुल मिलाकर 93 पार्षद हैं, लेकिन एक भी पार्षद स्वच्छता प्रतियोगिता के प्रति गंभीर नहीं है।
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इतना ही नहीं, नगर परिषद प्रशासन के बार-बार आग्रह के बावजूद पार्षदों ने वार्ड कमेटियों तक के लिए वार्डवासियों के नाम भी उपलब्ध नहीं करवाए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के इंचार्ज ने इसकी पुष्टि की है कि आज तक किसी वार्ड पार्षद ने स्वच्छता पुरस्कार के लिए आवेदन ही नहीं किया। इसी के चलते आज तक एक लाख रुपये की ग्रांट किसी भी वार्ड में नहीं दी जा सकी।
इस अभियान के साथ ही जिले में मौजूद नगर निकाय संस्थाओं के सभी वार्डों के बीच स्वच्छता की प्रतियोगिता आयोजित करवाई जानी थी। इस प्रतियोगिता में प्रत्येक माह सबसे स्वच्छ वार्ड का चयन होना था और उस वार्ड को एक लाख रुपये तक की ग्रांट ईनाम के रूप में दी जाएगी। इसी तरह नगर पालिकाओं के स्वच्छ वार्ड प्रतियोगिता के विजेताओं को पचास हजार रुपये की ग्रांट दी जानी थी। फतेहाबाद जिले में टोहाना और फतेहाबाद नगर परिषद हैं जबकि रतिया और भूना नगर पालिका हैं। हैरानी की बात तो ये है कि फतेहाबाद के साथ साथ टोहाना नगर परिषद, रतिया एवं भूना नगर पालिका के पार्षदों ने भी अपने-अपने वार्ड को बेहतर एवं स्वच्छ बनाने की दिशा में कोई औपचारिक प्रयास तक नहीं किए।
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अधूरे संसाधनों को पूरा करना एवं पार्षदों को स्वच्छता के लिए जागरूक करना था लक्ष्य
जिले की लगभग सभी नगर निकाय संस्थाओं में संसाधनों की कमी है। ऐसे में इस स्वच्छता प्रतियोगिता का मुख्य लक्ष्य था कि वार्ड का पार्षद अपने वार्ड की स्वच्छता के प्रति जागरूक हो और ग्रांट की रकम से अपने वार्ड की सफाई और सुंदरीकरण के लिए आवश्यक संसाधन अपने स्तर पर जुटा ले। लेकिन किसी भी पार्षद ने इस दिशा में कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई।
कचरा उठाने वाली गाडिय़ों ने सुधारी शहर की हालत, कचरा प्रबंधन प्लांट का टेंडर रद्द होने से फरि मुसीबत
शहर में नगर परिषद प्रशासन ने पिछले एक साल से गलियों में डोर टू डोर से कचरा उठाने के लिए विशेष टाटा ऐस गाडिय़ां लगा दी हैं। क्योंकि घरों से कचरा एकत्रित करके ये टाटा ऐस गाड़ियां उस कचरे को शहर में गिराने की बजाए सीधा डंपिंग जोन में ले जाती हैं। चूंकि अब कचरा प्रबंधन प्लांट का टेंडर अभी तक नहीं खोला गया है, इसके चलते शहर में फिर से कचरा प्रबंधन की समस्या जारी रहेगी।
फतेहाबाद जिले में नगर निकाय संस्थाओं की ये है रूपरेखा
नगर निकाय संस्था पार्षद
फतेहाबाद नगर परिषद 25
टोहाना नगर परिषद 23
रतिया नगर पालिका 17
भूना नगर पालिका 15
जाखल नगर पालिका 13
ये है नगर परिषद प्रशासन के पास मौजूद संसाधन
एक लाख के करीब आबादी वाले फतेहाबाद शहर में सफाई करने के लिए महज 169 कर्मचारी हैं जिसमें से सिर्फ 47 कर्मचारी ही पक्के हैं। इनमें से कुछ कर्मचारी टै्रक्टर-ट्रालियों पर, कुछ अधिकारियों की कोठी पर, कुछ अवकाश पर तो कुछ पहले से ही लंबी छुट्टी पर चल रहे हैं। ये तो गनीमत रही कि इस साल नगर परिषद प्रशासन ने 13 टाटा ऐस गाड़ियां खरीद ली जिसके कारण शहर में गंदगी कम हुई है।
‘सरकार की ओर से था प्रावधान था कि सबसे स्वच्छ वार्ड को एक लाख रुपये की ग्रांट दी जानी है। इसके लिए एक विशेष फॉरमेट में आवेदन तो पार्षद ने करना था। पिछले डेढ़ साल में एक भी पार्षद ने इस अवार्ड के लिए आवेदन ही नहीं किया है।’
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सौरभ कुमार, इंचार्ज स्वच्छ भारत मिशन, फतेहाबाद।
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