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स्कूल का नाम नहीं, नंबर प्लेट गायब, वैन में ठूंसकर ले जा रहे विद्यार्थी

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फतेहाबाद में बिना परिचालक विद्यार्थियों को लेकर जाती स्कूल वैन। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। विद्यार्थियों को निजी स्कूल ट्रांसपोर्ट की सुविधा दे रहे हैं, लेकिन इस सुविधा के नाम पर कई निजी स्कूल संचालक नौनिहालों की जान खतरे में डाल रहे हैं। निजी स्कूल बसों को लेकर तय नियमों को ही पूरा नहीं कर रहे। स्कूल बसों को लेकर बुधवार को पड़ताल की गई, जिसमें सामने आया कि सड़क पर तय स्पीड से ज्यादा बसें दौड़ रही हैं तो कहीं बसों पर स्कूल के नाम तक नहीं लिखे गए हैं। स्कूल की छोटी वैनों में तय सीमा से ज्यादा विद्यार्थी बिठाए जा रहे हैं। कई स्कूल बसों में बोनट पर विद्यार्थी बिठाए जा रहे है। यहां तक की स्कूल बसों के पीछे से रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट तक नहीं है।
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बता दें कि जिले में करीब 850 स्कूल बसें रजिस्टर्ड हैं। 40 फीसदी स्कूल बसें बिना परिचालक ही दौड़ रही हैं, बसों में फर्स्ट एड किट तक नहीं है। शिक्षा विभाग, आरटीए कार्यालय भी इसको लेकर गंभीर नहीं है। आरटीए कार्यालय अधिकारियों की माने तो 35 दिन अभियान चलाकर 21 चालान काटे गए हैं। अधिकारी भी मान रहे हैं कि कई निजी स्कूल संचालक दूसरे राज्यों से बसें ला रहे हैं जिसका यहां पर रजिस्ट्रेशन ही नहीं होता है। संवाद
केस एक
शहर के धर्मशाला रोड स्थित एक निजी स्कूल की वैन दोपहर करीब पौने दो बजे विद्यार्थियों को उन्हें घर पर छोड़ने के निकलती है। पड़ताल में सामने आया है कि वैन में तय सीमा से ज्यादा विद्यार्थी थे। पिछली तरफ हालात ऐसे थे कि विद्यार्थियों को जबरदस्ती ठूंस रखा था। यहां तक की वैन पर न तो रंग पीला था और न ही नाम लिखा हुआ था।
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केस दो
निजी स्कूलों की बसें जिसमें विद्यार्थियों को ट्रांसपोर्ट सुविधा दी जाती है, उसको लेकर गंभीर लापरवाही देखने को मिली। बीघड़ रोड पर फतेहाबाद से बीघड़ की तरफ जा रही बस में विद्यार्थी थे लेकिन बस के पीछे नंबर प्लेट तक नहीं थी। यहां तक की इमरजेंसी नंबर भी साफ नजर नहीं आ रहे थे।
केस तीन
स्कूल बसों को लेकर सख्त नियम है कि उसमें परिचालक होना चाहिए। लेकिन 40 फीसदी तक बसें ऐसी हैं जिनमें परिचालक ही नहीं होते हैं। बुधवार को पड़ताल की गई तो उसमें सामने आया कि अधिकतर बसों में विद्यार्थियों को चढ़ाने और उतारने के लिए परिचालक ही नहीं थे।
स्कूलों बसों में ये नियम पूरे होने जरूरी
स्कूल बस में सीसीटीवी लगा होना चाहिए
बस में स्पीड गवर्नर होना चाहिए ताकि लिमिट से ज्यादा न दौड़ पाएं
स्कूल बस में जीपीएस लगा होना चाहिए
बस चालक, परिचालक वर्दी में होने चाहिए
बस चालक के पास पांच साल पुराना हैवी लाइसेंस होना चाहिए
छात्राओं वाली बसों में महिला सहायक होनी चाहिए- बस पर स्कूल बस लिखा होना चाहिए
स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए
स्कूल बस पर स्कूल का नाम होना चाहिए
फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र लगाया जाए
स्कूल बस में पर्दे न लगाए जाएं
बस के शीशे पर काली फिल्म न लगाई जाए
बस पर रूट चार्ट, टाइम टेबल, स्कूल के नंबर लिखे जाएं
बस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा जाए
स्कूल की बसों पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 लिखा जाए
स्कूल बसों में आपातकालीन द्वार होना चाहिए
कोट
आरटीए कार्यालय की तरफ से पिछले दिनों 15 मार्च से 20 अप्रैल तक स्पेशल अभियान चलाकर स्कूल वाहन जांचे गए। कई वाहनों में कमियां मिली। करीब 21 स्कूल बसों के चालान काटे गए है। कार्यालय की तरफ से आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
-मनदीप सांगवान, इंस्पेक्टर, आरटीए
कोट
स्कूल बसों की चेकिंग आरटीए कार्यालय देखता है। समय-समय पर स्कूल बसों की चेकिंग को लेकर रोड सेफ्टी की होने वाली बैठक में इस मुद्दे को रखा जाएगा।
-दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी

फतेहाबाद में वैन जिस पर स्कूल का नाम तक नहीं।- फोटो : Fatehabad

फतेहाबाद के बीघड़ रोड पर स्कूल बस जिसके पीछे नंबर प्लेट तक नहीं।- फोटो : Fatehabad

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