नंदीशाला बनने के बाद शहर से सांड़ों की समस्या दूर होने के दावे किए जा रहे थे, लेकिन इसके शुरू होने के दो दिन बाद भी प्रशासन ने इसके लिए कोई पुख्ता योजना तैयार नहीं की है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिला प्रशासन और नगर परिषद प्रशासन शहर की गलियों और सड़कों से लावारिस पशुओं को नंदीशाला तक आखिर पहुंचाएगा कैसे। इसके अलावा मौजूदा नंदीशाला क्या शहर में घूमते हजारों लावारिस सांड़ों के लिए पर्याप्त भी हैं या नहीं। नंदीशाला में सांड़ों के पहुंचने के बाद उनकी देखभाल, चारे की व्यवस्था कैसे होगी, इन सवालों के जवाब अभी तक अधूरे हैं।
नंदीशाला में फतेहाबाद शहर से पकड़े सांड़ों को रखने को लेकर संशय बरकरार
मताना की नंदीशाला में फतेहाबाद शहर के सांड़ों को रखा जाएगा या नहीं, इस पर अभी तक स्थिति साफ नहीं की गई है। सूत्रों की मानें तो बीते दिनों अधिकारियों, पंचायत और अन्य नंदीशाला के संयोजकों की बैठक में जिले के अधिकारियों की ओर से ये कहा गया था कि शहर से पकड़े जाने वाले आवारा सांड़ों को लघु सचिवालय के सामने स्थित अस्थाई नंदीशाला में ही रखा जाएगा जबकि मताना और आसपास के गांवों से जो आवारा सांड़ पकड़े जाएंगे, उन्हें मताना गांव की नंदीशाला में रखा जाएगा। इस संशय को इसलिए भी बल मिलता है क्योंकि नंदीशाला के शुभारंभ पर जिन लावारिस सांड़ों को मताना की नई नंदीशाला में लाया गया था, वे सभी मताना और आसपास के ग्रामीण इलाकों से पकड़े गए थे। लघु सचिवालय के सामने स्थित अस्थाई नंदीशाला से अभी तक एक भी लावारिस पशु मताना गांव में बनाई गई नई नंदीशाला में नहीं भेजा गया है।
सरकारी खर्च किसे मिलेगा, इस बारे में स्थिति साफ नहीं
वर्तमान में नगर परिषद की ओर से लघु सचिवालय के सामने स्थित अस्थाई नंदीशाला के लिए प्रतिमाह तूड़ी का खर्च नगर परिषद से मिलता है। इसके अलावा पुलिस विभाग की ओर से प्रतिमाह लगभग एक लाख रुपये, जिला विकास एवं पंचायत विभाग से भी प्रतिमाह 20 हजार रुपये इस अस्थाई नंदीशाला को मिलता है। अब मताना में नई नंदीशाला बनने के बाद ये साफ नहीं है कि इस नंदीशाला के अस्तित्व में आने के बाद पुरानी अस्थाई नंदीशाला को मिलने वाला सरकारी पैसा इसे मिलेगा या इस नई नंदीशाला को प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पैसा रखरखाव आदि के लिए दिया जाएगा। अगर नई नंदीशाला को जिला प्रशासन और नप की ओर से ग्रांट दी जाती है तो इसका असर सीधे-सीधे शहर में आवारा सांड़ों की समस्या से निपटने पर पड़ेगा।
पुरानी नंदीशाला और गोशाला को तीन माह से नहीं मिला खर्च
नगर परिषद की ओर से बीघड़ रोड स्थित गोशाला को 25 हजार रुपये प्रतिमाह एवं लघु सचिवालय के सामने स्थित अस्थाई नंदीशाला को तूड़ी का बिल दिया जाता है, लगभग ये बिल एक लाख रुपये के करीब पड़ता है। हालांकि बीघड़ रोड गोशाला को पिछले चार माह से और अस्थाई नंदीशाला को पिछले तीन महीने से तूड़ी का पैसा नहीं मिला है। यहां के संयोजक आयेदिन नगर परिषद प्रधान और अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटते फिर रहे हैं। ऐसे में अगर इनका ही लाखों रुपये बकाया है तो मताना गांव की नई नंदीशाला को कैसे सरकारी सहायता उपलब्ध हो सकेगी।
इन सवालों के जवाब अभी तक अधूरे
1. मताना नंदीशाला में शहरी आवारा सांड़ रखे जाएंगे या ग्रामीण।
2. नप अधिकारी मानते हैं कि शहर में दो हजार से अधिक पशु हैं। मताना नंदीशाला की क्षमता एक हजार पशु की, बाकी कैसे संभलेगा। 3. मताना की नई नंदीशाला को अगर अस्थाई नंदीशाला वाले खर्चे मिलेंगे तो अस्थाई नंदीशाला को कैसे चलाया जाएगा।
4. आवारा सांड़ों को पकड़ने का अभियान कब और कैसे शुरू होगा।
5. इन आवारा सांड़ों की लगातार बढ़ती संख्या पर स्थाई लगाम लगाने के लिए प्रशासन क्या करेगा।
पिछले एक साल में आवारा पशुओं के चलते ये हुआ नुकसान
1. सवा सौ से ज्यादा छोटे-बड़े हादसे।
2. जिले भर में 15 से अधिक मौतें, सबसे ज्यादा रतिया में 8।
3. दो से अधिक घायल।
4. ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ने और सड़कें खतरनाक हुई।
ये है लोगों का कहना
हरेक गली-मोहल्ले में आवारा सांड़ों की भरमार है। अफसर इसको लेकर गंभीर नजर नहीं आते। अगर वे गंभीर होते तो अब तक इनका समाधान हो गया होता।
-सुभाष ग्रोवर, स्थानीय निवासी ।
नेशनल हाइवे पर ही मेरा कामकाज है, कई बार यहां से गुजरने लगता हूं तो यहां सड़क पर सांड़ बैठे मिलते हैं। एकदम से सांड़ आगे बैठे मिलने से दो बार बाइक से गिरते-गिरते भी बचा हूं।
-विनोद, स्थानीय निवासी ।
सड़क पर बैठे ये आवारा सांड़ अचानक से क्रोधित हो उठते हैं और आपस में लड़ने लगते हैं। कई बार यहां से गुजरने वाले रेहड़ी चालकों को इनके गुस्से का शिकार होना पड़ता है।
-प्रिंस, स्थानीय निवासी ।
सीधी बात : जेके अभीर, एडीसी, फतेहाबाद ।
प्रश्र : मताना नंदीशाला में क्या सिर्फ ग्रामीण अंचल से पकड़े पशु रखे जाएंगे
उत्तर : मताना नंदीशाला अस्थाई नंदीशाला का ही एक पार्ट है, इन दोनों को साथ चलाएंगे।
प्रश्र : नप अफसर खुद मानते हैं कि शहर में दो हजार से अधिक पशु, फिर एक हजार की क्षमता वाली नंदीशाला कैसे कारगर रहेगी।
उत्तर : जिलेभर में कुल साढ़े चार हजार के करीब पशु हैं। जिनमें से फतेहाबाद में लगभग 15 सौ के करीब हैं। इनको पकड़ा जाएगा फिर इसमें देसी सांडों को गौशाला में रखा जाएगा। इसके अलावा छोटे पशुओं के लिए अलग व्यवस्था की जाएगी। फिर जगह की दिक्कत नहीं रहेगी।
प्रश्र : एक नंदीशाला से सब मैनेज हो सकेगा, शहर में और आसपास के गांवों के आवारा पशुओं से निजात मिलेगी क्या ।
उत्तर : शुरुआत भर है ये। चिंदड़ में चार एकड़ जगह पंचायत देने को तैयार है। मानावाली में स्थानीय प्रयासों से नंदीशाला चल रही है। धीरे-धीरे पंचायतों का इससे जोड़ेंगे, अगर दो-दो एकड़ जगह भी पंचायतों से मिल जाएं तो दो-दो सौ करके सभी पशुओं को एडजस्ट किया जा सकता है।
प्रश्र : अस्थाई नंदीशाला और बीघड़ रोड़ गौशाला को तीन-चार माह से ग्रांट नहीं मिली है।
उत्तर : नगर परिषद में पिछले कई माह से नियमित अधिकारी नहीं थे, इसी वजह से दिक्कत आई है। इसे नियमित करवाया जाएगा।
प्रश्र : नंदीशाला तैयार हो गई है, लेकिन सड़कों से आवारा सांडों को हटाने का अभियान अभी तक शुरु नहीं
उत्तर : अधिकारियों से बात करूंगा, कोशिश रहेगी कि एक तारीख से शहर के विभिन्न चौकों और नेशनल हाइवे से पशुओं को हटाने की शुरुआत हो।