फतेहाबाद में कोरोना मृतक की चिता के लिए लकड़ियां उठाकर लाते डिप्टी सीएमओ डॉ. हनुमान ।
- फोटो : Fatehabad
अशोक नगर निवासी आत्माराम कोरोना से अपनी जिंदगी की जंग हार गए, लेकिन जिंदगी की जंग के साथ साथ वो सम्मानपूर्वक मौत की लड़ाई भी नहीं जीत सके। सभी को पता है कि कोरोना मृतक के अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों का शामिल होना संभव नहीं है, लेकिन प्रशासन ने जिस अंदाज में मृतक का अंतिम संस्कार करवाया है, वो भी संवेदनशीलता की हद से बाहर ही दिखा। भले ही स्वास्थ्य विभाग व नगर परिषद प्रशासन के कर्मचारियों ने इस मुश्किल समय में गजब की जीवटता का परिचय देते हुए कोरोना मृतक के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जा सकता था।
डिप्टी सीएमओ ने चिता के लिए उठाई लकडिय़ां, सवा घंटे तक चिता की इंतजार में एंबुलेंस में रहा शव
जिले में कोरोना के चलते पहली मौत के लिए शायद जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार नहीं थे। इसके चलते पहले तो अंतिम संस्कार की जगह को लेकर उहापोह की स्थिति बनी रही। बाद में जब ये तय किया गया कि सचिवालय के सामने हुडा के खाली पड़े मैदान में कोरोना मृतक का अंतिम संस्कार किया जाएगा, लेकिन तब भी किसी ने अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक रीति रिवाजों को पूरा करने की ओर ध्यान नहीं दिया। इससे अंदाजा लगाइये कि स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस में मृतक का शव सवा घंटे तक चिता का इंतजार करता रहा। बाद में नगर परिषद कर्मचारियों के साथ खुद डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. हनुमान व मीडिया कर्मियों ने चिता के लिए लाई गई लकडिय़ों को ट्राली से उतारकर चिता तैयार करवाई।
चिता जलाने के लिए भी घी की बजाये डीजल का हुआ इस्तेमाल
कोरोना मृतक की मौत के दौरान आवश्यक सावधानियां रखने का प्रोटोकॉल जारी किया गया है। हालांकि जिला प्रशासन इस मामले में खुलकर कुछ भी कहने से बच रहा है। आमतौर पर मृतक की चिता जलाने के लिए घी का इस्तेमाल किया जाता है, ये विधान भी है। लेकिन ये भी व्यवस्था देखिये कि फतेहाबाद में कोरोना के चलते पहली मौत का दंश झेलने वाला मृतक इस रीति-रिवाज से भी वंचित रह गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मृतक की चिता को जलाने के लिए घी की बजाए डीजल का इस्तेमाल किया। शव को लकड़ियों पर रखकर उस पर डीजल डाला गया और फिर उसे माचिस की तीली से अग्रि दी गई।
‘कोरोना मृतक के अंतिम संस्कार के लिए एसओपी तय हैं। जिन्हें सबके साथ सांझा नहीं कर सकते। हमारी संवेदनाएं मृतक के परिवार के साथ हैं, लेकिन हम भी अपनी डयूटी कर रहे हैं ताकि बाकी लोग सुरक्षित रह सकें।’ -डॉ. नरहरि सिंह बांगड़, जिला उपायुक्त, फतेहाबाद।