हरियाणा में अलग से हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के गठन की कोशिशों के बीच सिख समुदाय के नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। 11 सालों से अलग कमेटी की मांग कर रहे झिंडा और नलवी ग्रुप को 6 जुलाई के कैथल में होने वाले सिख महासम्मेलन में कांग्रेस की ओर से अलग कमेटी के गठन का ऐलान करने की आस है।
वहीं, इसके विरोध में शनिवार को पंचकूला में बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में कोई अहम फैसला हो सकता है। इस गुट का कहना है कि अलग कमेटी बनाने का अधिकार सिर्फ अकाल तख्त को ही है और अकाल तख्त का हुकुमनामा पूरे विश्व में लागू होता है।
प्रदेश के सिख पिछले 11 सालों से हरियाणा में अलग से गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2003 में दीदार सिंह नलवी और जगदीश सिंह झिंडा ने सिखों को इस मामले पर एकजुट करके हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एडहॉक) का गठन किया था। तभी से इनकी अलग प्रबंधक कमेटी की मांग चल रही है। बीच में झिंडा और नलवी गुट में दरार पड़ गई, लेकिन अब फिर दोनों एक सुर में मांग उठा रहे हैं। इसके लिए 2 लाख सिखों की ओर से शपथ पत्र चट्ठा कमेटी को दिए गए हैं।
हरियाणा से हो रहा है अन्याय : स्वर्ण सिंह
हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एडहॉक) के प्रवक्ता स. स्वर्ण सिंह का कहना है कि प्रदेश में 18 लाख सिख हैं, 70 गुरुद्वारे हैं, 2 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन है, चढ़ावे के रूप में 100 करोड़ से भी ऊपर की आमदनी होती है। यह आमदनी शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर (एसजीपीसी) के पास जाती है जो सरासर अन्याय है। गुरुद्वारों में जितने भी सेवादारों को नौकरी मिलती है, उसमें हरियाणा को प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।
पंजाबी भाषा के लिए कुछ नहीं किया जा रहा। प्रदेश में इतनी आमदनी होने के बावजूद न कोई बड़ा कॉलेज है और न ही कोई अन्य संस्थान। पंजाब पुनर्गठन एक्ट 1966 के अनुछेद 72 (2) के तहत प्रदेश सरकार को हक है कि वह अलग से किसी संस्था का गठन कर सकती है। चट्ठा कमेटी को हरियाणा के 2 लाख लोगों ने शपथ पत्र देकर अलग से गुरुद्वारा कमेटी गठित करने की मांग की थी।
अकाल तख्त के पास ही है पावर : अकाली दल हरियाणा
शिरोमणी अकाली दल हरियाणा के सरपरस्त जोगेंद्र सिंह अहरवां ने कहा कि जब भी चुनाव आते हैं, नलवी और झिंडा अगल कमेटी की मांग उठानी शुरू कर देते हैं, यह सिखों का धार्मिक मामला है। हरियाणा में एसजीपीसी के पास 7 गुरुद्वारे हैं। आमदनी कम और खर्चा ज्यादा है। हरियाणा में एसजीपीसी की 11 सीटें हैं, जिनमें एचएसजीपीसी ने अपने प्रत्याशी खडे़ किए थे, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। यह मामला अकाल तख्त के अधीन है।
अकाल तख्त चाहेगा तो अलग कमेटी बनेगी। अकाल तख्त सिखों की सबसे बड़ी पावर है। इसके फैसले के खिलाफ किसी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। अकाल तख्त चाहे तो इनकी सिखी भी खारिज कर सकता है। यह लोग मुख्यमंत्री के पिट्ठू बनकर अलग कमेटी की घोषणा करवाना चाहते हैं। अहरवां ने कहा कि इस मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
कांग्रेस कर रही राजनीति : बानीखेड़ा
अलग कमेटी के विरोधी और सिख नेता रणजीत सिंह बानीखेड़ा, अमरजीत कौर, रूप सिंह खोखर व महेंद्र सिंह वधवा का कहना है कि कांग्रेस वोटों की राजनीति करती है। लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस, इनेलो के परंपरागत वोट में सेंध लगाना चाहती है। कांग्रेस का प्रयास है कि अलग कमेटी की घोषणा करके सिख वोटर को अपने साथ जोड़ा जाए।
एलान से कमेटी नहीं बन सकती : वधवा
महेंद्र सिंह वधवा ने बताया कि सिर्फ एलान से अलग कमेटी नहीं बन सकती। केंद्रीय गृह मंत्रालय से इसकी स्वीकृति लेनी होती है पार्लियामेंट में भी इसका प्रस्ताव जरूरी है। यह लोग दिल्ली और पटना गुरुद्वारों की कमेटी की बात करते हैं। दिल्ली और पटना कमेटी अंग्रेजी शासनकाल से ही अलग है।
अकालीदल की बैठक आज नाडा साहिब में
अकालीदल हरियाणा के सरपरस्त जोगेंद्र सिंह अहरवां ने बताया कि शनिवार को नाडा साहिब (पंचकूला) में शिरोमणी अकाली दल के महासचिव और हरियाणा के प्रधान सांसद बलविंद्र सिंह भुंदड़ ने 3 बजे विशेष बैठक बुलाई है। इस बैठक में कोई बड़ा फैसला भी लिया जा सकता है।