फतेहाबाद। जिले में थैलेसीमिया बीमारी से पीडि़त मरीज आज भी उपचार के लिए भटक रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया है इस कारण से पीआरबीसी नहीं मिल पा रहे है। ऐसे में मरीजों को सिरसा या फिर हिसार जाना पड़ रहा है।
जिले में थैलेसीमिया बीमारी से पीडि़त 53 मरीज रजिस्टर्ड हैं। उनकी मदद के लिए फतेहाबाद थैलेसीमिया सोसायटी काम कर रही है। सोसायटी प्रधान मोहित का कहना है कि इस बीमारी से बचाव के लिए शादी से पहले कुंडली मिलाने से जरूरी दोनों की थैलेसीमिया जांच जरूरी की जाए तो संतान भी ग्रस्त नहीं होगी। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग को लोगों को जागरूक करना चाहिए।
थैलेसीमिया मरीजों के शरीर में खून नहीं बन पाता है और इसके लिए पीआरबीसी चढ़वाना पड़ता है। सोसायटी प्रधान का कहना है कि पेंशन के लिए कई बार दस्तावेज मांगे गए हैं लेकिन वह भी शुरू नहीं हुई है।
20 से 25 दिन बाद चढ़वाने पड़ते हैं आरबीसी
थैलेसीमिया से पीडि़त मरीज के शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से खत्म होने लगती है और नई सेल्स नहीं बनती हैं। इस वजह से उसके शरीर में खून की कमी रहती है। इस बीमारी में आरबीसी की उम्र 10 से 25 दिन रह जाती है जबकि सामान्य शरीर में ये 125 दिन तक रहती है। इस वजह से हर 20 से 25 दिन में रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
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स्वास्थ्य विभाग को इस बीमारी को रोकनेे के लिए जागरूक करना होगा। इस बीमारी को रोकने के लिए शादी से पहले लड़का-लड़की दोनों की जांच जरूरी की जाए। पीडि़त मरीज की मदद के लिए सोसायटी की तरफ से रक्तदान कैंप लगाए जाते हैं।
- मोहित मुंजाल, प्रधान, एफटीएस