फतेहाबाद। जिले के स्वयं सहायता समूह अब पंचायत की शामलात देह भूमि पट्टे पर लेकर डेयरी गतिविधियां शुरू कर सकेंगे। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) से जुड़े समूहों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने के लिए विकास एवं पंचायत विभाग ने नए नियम और शर्तें जारी की हैं। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और गांवों में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा।
जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी एवं उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद अनूप सिंह ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत उपायुक्त ग्राम पंचायत को 500 वर्ग गज तक की शामलात भूमि दो वर्ष की अवधि के लिए पट्टे पर देने की अनुमति दे सकेंगे। यदि स्वयं सहायता समूह की डेयरी गतिविधियां संतोषजनक पाई जाती हैं तो पट्टे की अवधि को तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए स्वयं सहायता समूह का कम से कम एक वर्ष से सक्रिय होना जरूरी है। समूह के पास नियमित बचत और ऋण का रिकॉर्ड होना चाहिए। समूह के सभी सदस्य उसी ग्राम पंचायत के निवासी होने चाहिए तथा समूह में कम से कम 10 सदस्य होना अनिवार्य है।
अनूप सिंह ने बताया कि समूह की बैठकों में सदस्यों की कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति भी जरूरी होगी। इसके अलावा किसी सरकारी योजना या बैंक में समूह का कोई लंबित विवाद अथवा डिफॉल्ट नहीं होना चाहिए। जिन स्वयं सहायता समूहों के किसी सदस्य या उसके परिवार के नाम परिवार पहचान पत्र के अनुसार 500 वर्ग गज या इससे अधिक भूमि दर्ज है वे योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इच्छुक स्वयं सहायता समूह संबंधित ग्राम पंचायत को आवेदन दे सकते हैं। आवेदन जिला परिषद या खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय के माध्यम से अथवा सीधे भी किया जा सकता है।