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पनडुब्बी में दो जवानों को आग से बचाते हुए शहीद हो गए सुखदेव

Fri, 23 Oct 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला टोहाना (फतेहाबाद)
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जल सेना में तैनात गांव कन्हड़ी के 25 वर्षीय शहीद सुखदेव सिंह का वीरवार यहां राजकीय सम्मान के साथ सलामी देकर अंतिम संस्कार किया गया। स्थानीय विधायक एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला सहित आसपास के गांवों व शहर के सैकड़ों लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
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पोर्ट ब्लेयर में थे तैनात
कन्हड़ी के कलीराम व सुमित्रा के छोटे पुत्र सुखदेव सिंह नेवी में नायक पद पर पोर्ट-ब्लेयर में तैनात थे। नौ अक्तूबर को एक पनडुब्बी में आग लगने के दौरान दो जवानों को बचाने के प्रयास में झुलस गए थे। उन्होंने दोनों साथी जवानों की जान तो बचा ली, लेकिन इस दौरान वे खुद इतना झुलस गए कि वे समुद्र में कूद गए।

उनके साथियों ने उसे बाहर निकाला और गंभीर हालत में अस्पताल में दाखिल करवाया। यहां दस दिन तक जिंदगी से जंग लड़ते हुए 20 अक्तूबर को कोलकाता के अस्पताल में उनकी मौत हो गई। जल सेना के अफसर उनके पार्थिव शरीर के साथ देर सांय गांव कन्हड़ी पहुंचे। हिसार से आए थल सेना के जवानों ने हवा में तीन फायर कर शहीद सुखदेव को सलामी दी और क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने फूलमालाएं चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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ढाई साल पहले हुई थी शादी
अगस्त 2008 में नेवी में भर्ती हुए शहीद सुखदेव सिंह की शादी ढाई साल पहले ही हुई थी। डेढ़ महीना पहले वह छुट्टी पर गांव आया था। बीस दिन पहले ही अपनी गर्भवती पत्नी को छोड़कर अपनी ड्यूटी पर पोर्ट ब्लेयर गया था। घर पर माता-पिता के अलावा उनका एक बड़ा भाई राजीव व बहन कमलजीत हैं। बडा भाई राजीव ट्रांसपोर्ट का काम करता है। सुखदेव ने 2004 में गांव कन्हड़ी के आर्य स्कूल से दसवीं कक्षा पास की थी। फिर बारहवीं करने के बाद वह 2008 में जल सेना में भर्ती हुआ था।

प्रदेश अध्यक्ष ने दिया शहीद के पार्थिव शरीर को कंधा
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने गांव कन्हडी में पहुंचकर शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाते हुए अपनी संवेदना व्यक्त की। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने शहीद के पार्थिव शरीर को कंधा देकर अंतिम यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि शहीद सुखदेव सिंह की बहादुरी ने टोहाना ही नहीं पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है।

वे संकट की घड़ी में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटे और जिस प्रकार अपने साथियों की जान बचाने के लिए स्वयं मौत के मुंह में कूद पड़े, उससे हम सभी गौरवान्वित महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी क्षेत्रवासी इस दुख की घड़ी में सुखदेव सिंह के परिवार के साथ हैं। उन्होने भरोसा दिलाते हुए कहा कि भाजपा की केंद्र व प्रदेश की सरकार शहीद के परिवार के सम्मान करेगी तथा हर संभव मदद के लिए तत्पर है।

बहादुरी की अनोखी मिसाल बना सुखदेव
दिल्ली से सुखदेव सिंह के पार्थिव शरीर को लेकर यहां पहुंचे नेवी के कैप्टन जवेंद्र कुमार चौधरी, नेवी प्रकोष्ठ से प्रदीप सिब्बर व शिप जीआई रामनिवास आदि ने बताया कि सुखदेव सिंह हमेशा बहादुरी की बातें करता था और अपने गांव व प्रदेश पर गर्व करता था। उन्होंने बताया कि आग की जिस घटना में सुखदेव सिंह की मृत्यु हुई है, उसमें कई लोगों की जान जा सकती थी लेकिन सुखदेव सिंह की सूझबूझ और बहादुरी से उनके अलावा कोई अन्य हताहत नहीं हुआ।

यूं हुआ सुखदेव घायल
मृतक के साथी के पिता गांव ढाकल निवासी रोहताश ने बताया कि उसका बेटा भी सुखदेव के साथ चीफ पेटी अधिकारी के पद पर कार्यरत है। कुछ दिन पहले आए सुखदेव के हाथ उसने अपने बेटे के लिए कुछ सामान भिजवाया था। घटना की रात उन्होंने एक साथ खाना खाया। जिस समय यह हादसा हुआ, उसका बेटा भी मौके पर मौजूद था।

जब उसका बेटा मुसीबत में हुआ तो सुखदेव ने अपनी जान की परवाह न करते हुए उसके बेटे सहित एक अन्य को अपने कंधों पर उठाकर बाहर निकाला। उसके बाद जब वह फटे हुए टैंकर का तेल जब सुखदेव पर गिरा तो उसे आग की लपटों ने घेर लिया। बुरी तरह झुलसा सुखदेव पानी में कूद गया। साथियों ने उसे निकालकर अस्पताल में भर्ती करवाया, लेकिन 10 दिन बाद जिंदगी की जंग हार गए।

इस मौके पर तहसीलदार नवदीप नैन, होशियारा कन्हड़ी, जीता कन्हड़ी, सरपंच महाबीर सिंह, सुरेश आर्य, शहर थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह, एएसआई जगमेल सिंह, फूल सिंह, गुरविंद्र, रामसही सहित समैण, टोहाना व आसपास के गांवों के लोग उपस्थित रहे।
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