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अपराधी खबरदार, खाकी में हम असरदार

Sun, 18 Oct 2015 12:13 AM IST
मुकेश खुराना/अमर उजाला फतेहाबाद
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लोगों ने विरोध किया और खुद के महकमे तक के कर्मचारियों ने ताने दिए, लेकिन फिर भी नहीं डिगे और बिना पीछे मुडे़ हर मुकाम को हासिल किया। इसी का नतीजा है जहां आज बागडोर महिलाएं संभाल रही हैं। फतेहाबाद जिला जहां पर एसपी संगीता कालिया ने आते ही अपराधियों पर लगाम कसी।
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आज भी वह पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलवाने में हर कदम आगे रहती हैं। महिला अधिकारी हो चाहे कर्मचारी, सभी का यही कहना है कि उन्होंने अपराध मिटाने के लिए खाकी वर्दी पहनी। महिला थाने का स्टाफ जो पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए महिलाओं को न्याय दिलवा रही हैं।

नाटक देखकर भरी उड़ान और बनी आईपीएस ऑफिसर
एसपी संगीता कालिया किसी उदाहरण से कम नहीं हैं। एक साधारण परिवार में रहकर उन्होंने सपना देखा और उसे पूरा किया। जिस पुलिस विभाग में पिता कारपेंटर हुआ करते थे आज उसी विभाग में खुद एसपी के पद पर तैनात हैं। एसपी कालिया बताती हैं कि उन्होंने उड़ान नाटक देखा और उसी से प्ररेणा लेकर आगे बढ़ी।
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पिता धर्मपाल जिस वर्ष में पुलिस विभाग से रिटायर हुए उसी वर्ष 2010 में हरियाणा पुलिस में आईपीएस के पद पर ज्वाइन किया। कालिया ने फतेहाबाद में एसपी के पद पर कार्यभार संभालते ही अपराधियों पर शिकंजा कसा। एसपी कालिया ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सेल्फ डिफरेंस जैसे कोर्स शुरू किए। साथ ही अब महिला कर्मचारियों के लिए क्रैच सेंटर खोलकर नई शुरुआत की है।

एसएचओ बिमला देवी ने खुद को किया साबित
परिजनों के सहयोग से पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पद पर तैनात हुई बिमला देवी जब 1994 में हिसार के मॉडल टाउन स्थित चौकी की इंचार्ज बनीं तो लोगों सहित खुद के महकमे ने खूब ताने दिए कि लुगाई के बस की बात कोनी। लेकिन बिमला देवी ने इसे नजर अंदाज करते हुए हर मुकाम को हासिल किया और आठ पुलिस स्टेशनों में एसएचओ के पद पर कार्यभार संभाला। फिलहाल वह महिला थाने में इंस्पेक्टर का कार्यभार संभाल रही हैं। अब तक आई 217 शिकायतों में से 147 में समझौता भी करवा दिया। बिमला देवी कहती हैं कि उन्हें नए एक्सपीरियंस से जूझना अच्छा लगता है और यही कामयाबी का राज है।

मनचलों को सबक सिखा रही सुंदर देवी और कमलेश
महिला थाने में तैनात कांस्टेबल सुंदर देवी और कमलेश राइडर हैं। सुबह कॉलेज और स्कूल समय में दोनों बाइक पर राउंड लगाती हैं और शरारती तत्वों पर नजर रखती हैं। कांस्टेबल सुंदर देवी और कमलेश कहती हैं कि हर बहन, बेटी व मां को घटनाओं से सुरक्षित रखना उनकी जिम्मेवारी है।

टूटे घर को बसाने का काम करती है राजबाला
पुलिस विभाग में वर्ष 2008 में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हुई राजबाला ने अलग थानों में जांच अधिकारी के पद पर रहकर कई केस सुलझाए हैं। अब वह महिला थाने में तैनात हैं। जहां पर वह पति-पत्नी के बीच गलतफहमी के कारण आई दरारों को दूर कर उन्हें दोबारा बसाने का काम कर रही हैं। राजबाला ने महिला थाने में आई ऐसी शिकायतें में से 67 परिवारों को टूटने से बचाया। राजबाला कहती हैं कि जब वह टूटे घर को दोबारा जोड़ती हैं तो उनके मन का तसल्ली भी मिलती है।

लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए तैयार कर रहीं अरुणा
सब इंस्पेक्टर अरुणा छेड़छाड़ करने वालों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए सेल्फ डिफेंस के गुर सिखा रही हैं। एसपी संगीता कालिया ने इस पर पहल की और पुलिस लाइन में महिलाओं और लड़कियों को आत्मरक्षक बनाने के लिए अभियान चलाया गया। अरुणा एशियन मेडलिस्ट हैं और पुलिस विभाग में भी वह कई उपलब्धियां प्राप्त की चुकी हैं।
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