रतिया। शहर के श्रीकृष्ण गोशाला रोड के समीप निर्माणाधीन खाटू श्याम मंदिर में श्रीखाटू श्याम मंदिर ट्रस्ट व श्रीबांके बिहारी महिला मंडल की ओर से श्रीश्याम कथा आयोजित की जा रही है। इसके दूसरे दिन व्यास पीठ से कथावाचक पुरुषोत्तम शर्मा ने बर्बरीक जन्म, भीम दादा और बर्बरीक पोता में युद्ध, भगवान कृष्ण ही बर्बरीक के गुरु, बर्बरीक द्वारा स्वच्छता का संदेश आदि प्रसंग सुनाया।
उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि घटोत्कच व माता मोरवी को तीन पुत्र रत्नों की प्राप्ति हुई। सबसे बड़े पुत्र के बाल बब्बर शेर की तरह होने के कारण उसका नाम बर्बरीक रखा गया। ये वही वीर बर्बरीक हैं, जिन्हें लोग खाटू के श्रीश्याम, कलयुग के देव, श्याम सरकार, तीन बाणधारी, शीश के दानी, खाटू नरेश व अन्य अनगिनत नामों से जानते हैं। कथावाचक ने कहा कि एक दिन पांडव वनवास काल में भ्रमण करते हुए भूखे प्यासे उस तालाब के पास पहुंचे, जिससे वीर बर्बरीक सिद्ध अंबिकाओं के पूजन के लिए जल लिया करते थे। महाबली भीम प्यास से उतावले थे। वे बिना हाथ-पैर धोए ही उस तालाब में प्रवेश कर गए। बर्बरीक ने गर्जना करते हुए भीम को ऐसा करने से रोका।
इसके बाद बात बढ़ गई और भीम व बर्बरीक के बीच महायुद्ध शुरू हुआ। बर्बरीक ने महाबली भीम को अपने हाथों से उठा लिया और जैसे ही उन्हें सागर में फेंकना चाहा, सिद्ध अंबिकाएं प्रकट हो गईं। उन्होंने बर्बरीक से भीम का वास्तविक परिचय करवाया। इस मौके पर बलविंद्र गर्ग, सन्नी बांसल सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।