गांव मेहूवाला में बना शहीद नरेंद्र सिंह स्मारक। स्रोत ग्रामीण
फतेहाबाद। कारगिल युद्ध में गांव मेहूवाला के जवान नरेंद्र सिंह जाखड़ ने दुश्मनों से मुकाबला करते हुए 9 जुलाई 1999 को वीरगति प्राप्त की थी। उन्हीं की याद में गांव मेहूवाला में गांव की मुख्य फिरनी पर स्मारक बनाया गया है।
नरेंद्र सिंह सेना में भर्ती होने से पहले आईटीआई कर चुके थे। सेना में भर्ती होने के बाद उनका बिजली निगम में लाइनमैन पद के लिए भी चयन हो गया लेकिन नरेंद्र ने लाइनमैन की नौकरी करने के बजाय देश सेवा को चुना और 21 साल की उम्र में ही कारगिल युद्ध में देश के लिए काम आ गए।
शहीद नरेंद्र सिंह का जन्म 17 सितंबर 1978 को एक ऐसे परिवार में हुआ जो देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत था। उनके दादा अमर सिंह जाखड़ व पिता जय सिंह जाखड़ भी बीएसएफ में थे। उनके चाचा बिहारी लाल जाखड़ 17 जाट रेजिमेंट में थे तो उनके परिवार के गंगा सिंह, जगदीश, इंद्राज, भागीरथ सिंह, प्रताप सिंह, चिरंजीलाल व सतपाल सिंह भी सेना में सेवा दे रहे हैं।
त्रिशूल घाटी में पहली गोली जांघ में लगी, दूसरी सिर में
जाट रेजिमेंट के सिपाही नरेंद्र सिंह को कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों से मुकाबला करने के लिए भेजा गया। वे दुश्मनों को पीछे खदेड़ते हुए मशकोह घाटी के प्वाइंट 5301 पर पहुंच गए। वहां पर बहादुरी से मुकाबला करते हुए दुश्मनों को पीछे खदेड़ दिया। इसके बाद त्रिशूल घाटी पर तिरंगा लहरा दिया। रात का समय होने के कारण दुश्मनों ने मौके का फायदा उठाते हुए हमला बोल दिया। उनसे मुकाबला करते हुए एक गोली नरेंद्र सिंह की जांघ और दूसरी सिर में लगी। घायल नरेंद्र सिंह मशकोह घाटी के प्वाइंट 5301 पर गिर पड़े और भारत माता का जयकारा लगाते हुए शहीद हो गए।
गांव मेहूवाला में बना शहीद नरेंद्र सिंह स्मारक। स्रोत ग्रामीण