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Fatehabad News: सिर्फ चौधर मिली, विकास के लिए नहीं आया पैसा

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गांव मताना में टूटी गांव की फिरनी पर बहता पानी।
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फतेहाबाद। डेढ़ साल का इंतजार कर रही ग्रामीण सरकार को चौधरी तो मिल गए, लेकिन अब उनके हाथ में गांंवों के विकास के लिए कोई फंड नहीं आया है। 25 नवंबर को गांवों के सरपंच नियुक्त किए गए थे और तीन दिसंबर को नई पंचायतों ने अपना कार्यभार संभाल लिया। इसके बाद गांवों में विकास के लिए फंड तो घोषित कर दिए गए, लेकिन अभी तक पंचायतों के खाते में एक भी रुपया नहीं आया है। जिला परिषद व पंचायत समिति की भी बैठक केवल अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के लिए हुई है, लेकिन विकास कार्यों के लिए कोई भी बैठक नहीं हुई है। बड़ी बात यह है कि अभी तक जिला परिषद व पंचायत समिति के अध्यक्ष व उपाध्यक्षों का शपथ ग्रहण समारोह भी नहीं हुआ है।
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बता दें कि डेढ़ साल के इंतजार के बाद 25 नवंबर को फतेहाबाद में 259 ग्राम पंचायतों के चुनाव हुए। चुने गए प्रतिनिधियों को तीन दिसंबर को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलवाई गई। सरपंचों को उम्मीद थी कि नई पंचायत बनते ही उनके खातों में फंड आएगा और वह विकास कार्य करवा सकेंगे, लेकिन मसला ई-टेंडरिंग में फंस गया। हालांकि सरकार ने अलग-अलग पंचायतों को फंड देने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन पंचायतों के खातों में एक भी रुपया नहीं आया है, जिस कारण सरपंच भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। वहीं फतेहाबाद में जिला परिषद व पंचायत समिति के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष तो चुन लिए गए हैं, लेकिन उनका शपथ ग्रहण समारोह अभी तक आयोजित नहीं हो पाया है। शपथ ग्रहण के बाद ही अध्यक्ष व उपाध्यक्ष साइनिंग अथॉरिटी होंगे, जिस कारण भी फंडों का मामला अटका पड़ा है। संवाद

जिला परिषद और ब्लॉक समिति की दो बार हुई बैठक, केवल अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने
फतेहाबाद में जिला परिषद के 18 सदस्य व फतेहाबाद ब्लॉक में 30 पंचायत समिति सदस्य चुने गए। जिला परिषद व ब्लॉक समिति की दो-दो बार मीटिंग हुई है, लेकिन दोनों ही बार अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के लिए ही बैठक हुई। इसके बाद अभी तक विकास कार्यों के लिए जिला परिषद व ब्लॉक समिति की कोई मीटिंग नहीं हुई है।
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फतेहाबाद के लिए जारी हुई है साढ़े 12 करोड़ की राशि
राज्य वित्त आयुक्त की ओर से फतेहाबाद हलके की 47 पंचायतों के लिए 12 करोड़ 54 लाख 77 हजार रुपये की राशि जारी की है, लेकिन यह राशि पंचायतों के खाते में अभी तक नहीं आ पाई है। हालांकि एक ओर बीडीपीओ कार्यालय अगले सप्ताह से ई-टेंडरिंग के जरिए कार्य करवाने की बात कह रहा है, लेकिन पंचायतों के खाते में अभी तक राशि न आने के कारण सरपंच भी अपने गांवों की समस्याओं को दूर नहीं करवा पा रहे हैं। सरपंचों का कहना है कि गांवों में अनेक समस्याएं हैं, ई-टेंडरिंग के तहत विकास कार्य तो हो सकते हैं, लेकिन पंचायतों के खातों में रुपये ही नहीं आएंगे तो ई-टेंडरिंग का क्या फायदा। उनका कहना है कि गांवों में अनेक समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं। सरपंच बनने से पहले उन्होंने इन समस्याओं को प्राथमिकता से दूर करने का वायदा किया था, लिस्ट भी तैयार है, लेकिन पंचायतों को अभी तक फंड ही नहीं मिला है।
कोट
सरकार की ओर से मेरे गांव को 29 लाख से अधिक की ग्रांट जारी की गई है, लेकिन अभी तक यह ग्रांट जारी नहीं हुई है। 17 साल बाद पहली बार गांव मताना की अपनी पंचायत बनी है और यह विकास से अछूता था, लेकिन अब ग्रांट पंचायत के खाते में न आने से अब ग्राम पंचायत के काम रुके हुए हैं। करीब दो माह बीत गए हैं पंचायत बने, लेकिन फंड खातों में नहीं आया है।
-दलबीर शास्त्री, सरपंच मताना
कोट
मेरा छोटा सा गांव है और गांव के लिए पांच लाख से अधिक की राशि विकास के लिए जारी की गई थी, लेकिन यह अभी तक ग्राम पंचायत के खाते में नहीं आई है। गांव के स्कूल की दीवार गिरी हुई है, जिसका निर्माण करवाया जाना आवश्यक है, वहीं गांव के आंगनबाड़ी केंद्र की हालत काफी जर्जर है, यहां नई इमारत बनाई जानी है। एस्टीमेट तैयार है, लेकिन ग्राम पंचायत के खाते में फंड नहीं आया है।
कोट
जिला परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का अभी शपथ ग्रहण समारोह आयोजित नहीं हुआ है। अभी तक जिला परिषद के पास ग्रामीण कल्याण के लिए ग्रांट भी नहीं आई है। शपथ ग्रहण समारोह के बाद ही अध्यक्ष व उपाध्यक्ष हस्ताक्षरित अथॉरिटी होंगे। इसके बाद ही बजट विस्तारण किया जा सकेगा।
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-सुमन खिचड़, चेयरपर्सन, जिला परिषद फतेहाबाद
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