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Fatehabad News: गुमनाम हो गए, नेताजी के पांच सिपाही, आज तक प्रशासन नहीं ढूंढ़ पाया परिवार

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  मुख्य सचिव द्वारा जिला उपायुक्तों को भेजा गया पत्र।
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फतेहाबाद। देश की आजादी के लिए नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले जिले के पांच गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों तक आज तक प्रशासन नहीं पहुंच पाया है। इन स्वतंत्रता सेनानियों का रिकाॅर्ड राष्ट्रीय अभिलेखागार में तो है, लेकिन स्थानीय प्रशासन आज तक इन गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों तक नहीं पहुंच पाया है। बड़ी बात यह है कि प्रशासन ने कभी इसके लिए प्रयास भी नहीं किया, जबकि एक स्वतंत्रता सेनानी के बेटे चरखीदादरी निवासी श्रीभगवान फोगाट उनका रिकाॅर्ड निकालने में सफल रहे।
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वह बार-बार मुख्य सचिव से इन स्वतंत्रता सेनानियों का रिकार्ड व उनके परिजनों को ढूंढ़ने के लिए ज्ञापन दे रहे हैं और मुख्य सचिव की ओर से बार-बार प्रदेश के सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्राचार भी किया जा रहा है, लेकिन आज तक इन देश की आजादी के मतवालों का रिकार्ड प्रशासन नहीं ढूंढ पाया है। श्रीभगवान फोगाट ने बकायदा इसके लिए इन स्वतंत्रता सेनानियों की सूची व उनके गांव के नाम भी प्रशासन को मुहैया करवाए हैं, लेकिन मामला ढाक के तीन पात जैसा है। संवाद
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पिता का रिकाॅर्ड निकाला, फिर ढूंढ़े 287 गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी
दादरी के स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय राम सिंह फोगाट के रिकाॅर्ड को खोजते-खोजते उनके बेटे श्रीभगवान फोगाट ने ऐसे 287 गुमनाम शहीदों के नाम खोज डाले। इनमें 37 स्वतंत्रता सेनानी तो पुराने हिसार जिला, जिसमें हिसार, सिरसा, फतेहाबाद व भिवानी शामिल हैं के गांवों से हैं। अब जो पीढ़ी इनके परिवार में हैं, उनको नहीं पता कि उनके परिजन स्वतंत्रता सेनानी रहे थे। वर्ष 1940 से 47 के समय का पता होने के कारण श्रीवानभग भी इनके पास पहुंच नहीं पा रहे हैं। हालांकि श्रीभगवान के आग्रह पर मुख्य सचिव सभी उपायुक्तों को यह काम करने को आदेश दे चुके हैं, लेकिन सरकार के किसी नेता द्वारा दिलचस्पी न दिखाने के कारण प्रशासन उन स्वतंत्रता सेनानियों को भूल गया है।
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मैं लगातार कर रहा हूं प्रयास
फोगाट श्रीभगवान फोगाट ने बताया कि आजादी की लड़ाई में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में अनेक स्वतंत्रता सेनानी जुड़े थे। उनके पिता भी इसमें शामिल थे, लेकिन उनको लाभ नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय अभिलेखागार से रिकार्ड निकलवाया तो स्वयं हैरान रह गए। उनके पिता के अलावा 287 ऐसे स्वतंत्रता सेनानी हैं, जिनको आज तक लाभ नहीं मिला है। कुछ स्वतंत्रता सेनानियों को तो उन्होंने ढूंढ़ा भी है। श्रीभगवान ने बताया कि यदि किसी परिवार को अपने पूर्वजों के आजाद हिंद फौज में होने की थोड़ी भी जानकारी है तो वे उनका रिकार्ड भी ढूंढ़वाने में मदद कर सकते हैं।

फतेहाबाद के पांच स्वतंत्रता सेनानियों को नहीं मिला लाभ
फतेहाबाद के पांच गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों में फतेहाबाद के जाखल क्षेत्र के चांदपुरा गांव के नारायण सिंह, भट्टू क्षेत्र के मंदोरी गांव के सुरजा राम, फतेहाबाद के खाबड़ा कलां गांव निवासी रामजी लाल, समैन गांव निवासी दयाराम, चंद्रावल गांव निवासी अमीलाल शामिल हैं। इन स्वतंत्रता सेनानियों का रिकार्ड आजतक जिला प्रशासन नहीं ढूंढ पाया है और ना ही इनके परिजनों तक पहुंच पाए हैं।

संस्कृति मंत्रालय ने उठाया कदम
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओेर से गुमनाम शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों के वृत संग्रह के लिए चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रविप्रकाश को जिम्मेदारी दी गई है। वह गुमनाम शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों की खोजबीन के लिए श्रीभगवान फोगाट की मदद भी ले रहे हैं।

मुख्य सचिव की ओर से चार बार जारी हो चुका है लेटर
पुराने हिसार जिले के इन 37 स्वतंत्रता सेनानियों का रिकार्ड श्रीभगवान फोगाट हिसार के आयुक्त कार्यालय में दे चुुके हैं। मुख्य सचिव की ओर से इन गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों की खोज के लिए संबंधित जिला उपायुक्तों को पत्रा भी लिखे जा चुके हैं, लेकिन आज तक इनकी पहचान नहीं हो पाई है। उपायुक्तों की एमए ब्रांच में भी इनका रिकार्ड नहीं मिल रहा है।
कोट
मेरा मकसद सिर्फ इतना है कि जिन स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी में अपना अहम योगदान दिया, उनके परिवार को सदस्यों को पता चले कि उनके दादा परदादा कभी देश सेवा में जुटे थे। हिसार, सिरसा, फतेहाबाद व भिवानी की खाप पंचायतों व सामाजिक संगठनों से मेरा परिचय नहीं हो पा रहा है। कुुछ गुुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों का पता चला है और बहुत से रह गए हैं। अगर प्रशासन मदद करे तो इनका पता चल सकता है। श्रीभगवान फोगाट, अनसंग हीरोज की खोज करने वाले।
प्रदेश में अनेक गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं, जिनकी तलाश की गई है। अब तक मैंने 286 स्वतंत्रता सेनानियों को खोजकर उनकी रिपोर्ट संस्कृति मंत्रालय को दे दी है। वहीं 90 और पहचाने गए हैं। फतेहाबाद व हिसार के स्वतंत्रता सेनानियों का पता नहीं चल पाया है, जिनके परिवारों की तलाश की जा रही है।
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-डॉ. रवि प्रकाश, विभागाध्यक्ष इतिहास, चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी, भिवानी।
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