फतेहाबाद। खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा त्योहारी सीजन में लिए गए खाद्य पदार्थों की सैंपल रिपोर्ट आई है। रिपोर्ट काफी चौकाने वाली रही। जिस मावा से मुख्य तौर पर मिठाई तैयार होती है उसका ही सैंपल फेल मिला है। तीन मावा के सैंपल अनसेफ मिले है। जांच में मावा में फफूंदी मिली है जो कि स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है।
इसके अलावा तीन और सैंपल फेल मिले हैं। रिपोर्ट में एक चटनी, एक मावा और एक दूध का सैंपल सब स्टैंडर्ड मिला है। यानि इनमें मानक के आधार पर गुणवत्ता नहीं मिली है। विभाग द्वारा 1 सितंबर से लेकर 19 नवंबर तक 69 सैंपल लेकर सील करके लैब में भेजे गए। इसमें अब 29 की रिपोर्ट आई है। जिसमें 6 सैंपल फेल और 23 पास मिले हैं। बताया जा रहा है कि मावा में फफूंदी का मुख्य कारण कई दिन पहले तैयार किया होना हो सकता है।
- पिछले साल लिए गए 154 सैंपल, 44 मिले फेल
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की तरफ से वर्ष 2023 में 154 सैंपल लिए गए थे। इसमें विभाग के पास जो रिपोर्ट आई है उसके मुताबिक 44 सैंपल फेल मिले हैं। जिसमें मसाले, दूध, पनीर खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इसके अलावा इस साल जनवरी से सितंबर माह तक 118 सैंपल लिए गए। जिसमें 21 सैंपल फेल मिले हैं और 90 की रिपोर्ट ठीक मिली है।
-फेल सैंपल के 53 केसों में कोर्ट ने लगाया 4.87 लाख रुपये जुर्माना
खाद्य एवं औषधि विभाग ने अप्रैल 2023 से लेकर मार्च 2024 तक अनसेफ के 6 केस सीजेएम कोर्ट में भेजे हैं। इसके अलावा सब स्टैंडर्ड के 43 केस एडीसी कोर्ट में भेजे हैं। अधिकारियों की माने तो एडीसी की कोर्ट ने 53 केसों में मिलावटखोरों पर 4.87 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
- एक लाख तक हो सकता है जुर्माना
जो भी सैंपल फेल आए हैं, इसको लेकर संबंधित दुकानदार को 30 दिन का नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद अनुमति लेकर मामला कोर्ट में भेजा जाएगा। कोर्ट मामले में एक लाख रुपये का जुर्माना और 6 माह कैद की सजा कर सकती है। फफूंदी लगने के मुख्य तौर पर उसे सही तापमान में न रखना कारण हो सकता है।
- ओमकुमार, डीओ, खाद्य एवं औषधि विभाग, फतेहाबाद।
सैंपल के नाम पर हो रही है खानापूर्ति
जिले में दो-दो अधिकारी हैं लेकिन फिर भी खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर खानापूर्ति की जा रही है। दिवाली त्योहार पर जो सैंपल लिए गए, उनकी रिपोर्ट अब आई है, जिसका अब कोई फायदा ही नहीं है। मिठाई में सबसे ज्यादा मावा ही प्रयोग होता है और वह ही ठीक नहीं है तो इसका मतलब हम मीठा जहर ही खा रहे हैं।
- हरदीप सिंह, अध्यक्ष, जिंदगी वेल्फेयर संस्था, फतेहाबाद।
-जिला स्तर पर होनी चाहिए लैब
खाद्य पदार्थों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। बीमारियां बढ़ने का कारण ही यही है कि हम शुद्ध नहीं खा रहे हैं। हर चीज में मिलावट है। विभाग को जांच का दायरा बढ़ाना चाहिए और जिला स्तर पर लैब होनी चाहिए। जांच रिपोर्ट के बाद ही बिक्री का प्रावधान होना चाहिए। मिलावटी मिठाइयां खाने के कारण ही गले में इंफेक्शन और पेट संबंधित बीमारियां हो रही हैं।
- विनोद अरोड़ा, अध्यक्ष, सिटी वेल्फेयर क्लब, फतेहाबाद।