फतेहाबाद। जिला नागरिक अस्पताल में दवाइयों की कमी से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। हालात ऐसे हैं कि गर्भवती महिलाओं से लेकर सामान्य मरीजों तक को बाहर मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
अस्पताल में रोजाना करीब डेढ़ हजार मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं लेकिन दवा काउंटर पर उन्हें निराशा मिल रही है। कैल्शियम, एसिडिटी और तेजाब बनने के इलाज की दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। आंखों के इलाज में उपयोग होने वाली सीएमसी जैसी जरूरी दवाओं का स्टॉक भी खत्म हो चुका है।
बताया जा रहा है कि दवाओं के बढ़ते दाम और पुराने टेंडर पर सप्लाई देने से वेंडरों के इन्कार के चलते यह स्थिति बनी है। इससे अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी में आने वाले मरीज भी दवाएं नहीं मिलने से परेशान हैं जिससे उनका इलाज प्रभावित हो रहा है। संवाद
दो साल से वेयर हाउस नहीं आई कैल्शियम दवा
वेयर हाउस से दवाइयां न मिलने पर सिविल सर्जन कार्यालय जरूरत की दवाइयों की खरीद करता है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार दवाइयों की सप्लाई का टेंडर पुरानी दरों पर जारी है जबकि बाजार में दवाइयों के रेट बढ़ चुके हैं। इसी वजह से वेंडर पुराने टेंडर पर दवाइयां देने से मना कर रहे हैं। ऐसे में अब नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालात ये है कि दो साल से कैल्शियम दवा ही अस्पताल में नहीं आई है।
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मनोरोगियों के सामने संकट
तनाव, नींद न आना समेत मनोरोगियों के सामने दवाइयों का सबसे ज्यादा संकट है। लंबे समय से दवा ले रहे मरीजों को संबंधित दवा उपलब्ध न होने पर दूसरी दवाई लिखी जा रही है इस बारे में मरीज एतराज जता रहे हैं। मरीजों का कहना है कि नई दवाई का असर उपचार को प्रभावित करता है।
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वेंडरों के लिए बजट तक नहीं, जनऔषधि केंद्र बंद
जिले में दवाइयों की खरीद के लिए बजट भी नहीं है। करीब डेढ़ करोड़ बकाया है और विभाग की तरफ से फिलहाल करीब 75 लाख रुपये जारी किए गए है। ऐसे में पिछली उधार चुकाने बाद भी 75 लाख बकाया रह जाएंगे। वहीं नागरिक अस्पताल में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र पिछले साल जुलाई माह से बंद है। विभाग ने इसकी शुरुआत इसलिए की थी ताकि डिस्पेंसरी पर दवा न मिलने पर कम रेट में यहां से खरीदी जा सके लेकिन अस्पताल में मरम्मत कार्य के चलते केंद्र तब से ही बंद है। यहां पर रखी दवाइयां तक एक्सपायरी हो चुकी है।
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नागरिक अस्पताल में कुछ दवाइयों की कमी है। इस बारे में टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जल्द ही वेंडरों से दवाइयां खरीद ली जाएंगी।
-डॉ. बुधराम, सिविल सर्जन