फतेहाबाद। धांगड़ माइनर में पानी बंद होने से गांव मताना में पेयजल संकट छाया हुआ है। गांव के जलघर में बनी डिग्गी पिछले कई दिनों से खाली पड़ी है जिससे ग्रामीणों को नहरी पेयजल नहीं मिल पा रहा है। इस कारण ट्यूबवेल के खारे पानी की आपूर्ति की जा रही है जिसे पीने के लिए ग्रामीण मजबूर हैं।
ग्रामीण संदीप, अमर, दिनेश और दीपक बताया कि गांव मताना की आबादी 5 हजार के करीब है और जलघर में पानी की आपूर्ति धांगड़ माइनर के माध्यम से होती है। यह माइनर पिछले करीब 15 दिनों से बंद पड़ी है। माइनर की समय पर सफाई और रखरखाव नहीं होने के कारण जल प्रवाह प्रभावित हो गया है। जिससे जलघर तक पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंच पा रहा जिससे जलघर की डिग्गी पूरी तरह सूख गई है।
जलघर में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने पर इसमें एक माह तक का पानी स्टोर रहता है लेकिन पिछले 15 दिनों से स्थिति लगातार खराब हो रही है। डिग्गी में पानी नहीं होने के कारण अब ट्यूबवेल से जलापूर्ति हो रही है। ट्यूबवेल से आने वाला पानी खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं है फिर भी लोगों को इसी का उपयोग करना पड़ रहा है।
मंगवाने पड़ रहे कैंपर
ग्रामीण संदीप ने बताया कि खारे पानी के सेवन से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलघर की डिग्गी में पर्याप्त मात्रा में पेयजल स्टोर किया जाए ताकि गांव के लोगों को खारे पानी के बजाय स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल मिल सके। वहीं लोग पेयजल के लिए पास लगती धांगड नहर से पानी ला रहे हैं तो कई परिवार पीने के लिए कैंपर मंगवा रहे हैं। जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
महीने में 15 दिन बंद रहती है माइनर
गांव मताना के जलघर में धांगड़ माइनर से पानी की आपूर्ति होती है। इस बारे में ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग से मांग की है कि धांगड़ माइनर की जल्द से जल्द सफाई कर उसे चालू कराया जाए ताकि जलघर तक पर्याप्त पानी पहुंच सके। फिलहाल धांगड़ माइनर बंद है ऐसे में समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है।
:: गांव मताना के जलघर की डिग्गी में दो फीट पानी है। डिग्गी में मछलियां होने के कारण इस पानी की आपूर्ति बंद की गई है। रविवार को धांगड़ माइनर में पानी आ जाएगा जिसके बाद सुचारु तौर पर पानी की सप्लाई होगी। वहीं लोगों से अपील है पानी की बर्बादी को रोके, अगर पानी बर्बाद नहीं होगा तो पेयजल की किल्लत नहीं होगी।
- सतपाल रोहज, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग, फतेहाबाद।