फतेहाबाद। प्रशासन द्वारा शाम छह बजे बाजार बंद करने के जारी आदेशों से शहर में छोटे रोजगार चलाने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ गई है। सबसे ज्यादा परेशानी शाम के समय चौक-चौराहों पर फास्ट फूड के ठेले लगाने वालों की बढ़ी है। शहर में अलग-अलग क्षेत्रों में 200 से ज्यादा फास्ट फूड की रेहड़ियां लगती हैं। इनमें से अधिकांश रेहड़ियों पर शाम 5 बजे के बाद ही काम शुरू होता है। कह सकते हैं कि छह बजे तक गुलजार होता है मगर अब छह बजते ही रेहड़ियां वापस घरों की ओर ले जानी पड़ रही है।
फास्ट फूड विक्रेताओं का कहना है कि प्रशासन को उनके जैसे छोटे रोजगार चलाने वालों के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने के बाद पाबंदियां लगाई जानी चाहिए थी। शहर में लगने वाली 200 रेहड़ियों से 500 से ज्यादा परिवारों का गुजारा होता है। इनमें सबसे अधिक संख्या चाट-पकौड़ी, मोमोज, चाप, डोसा, सूप, बर्गर-चाऊमीन की रेहड़ियां लगाने वाले हैं। अकेले पपीहा पार्क के सामने ही हर रोज 70 रेहड़ियां लगती हैं। इसके अलावा जवाहर चौक, भट्टू रोड, बीघड़ रोड, चार मरला कॉलोनी, डीएसपी रोड, भीमा बस्ती में भी रेहड़ियां लगती है। जहां सैकड़ों की संख्या में शहरवासी रोजाना फास्ट फूड खाने आते हैं।
रोज का कमाना, रोजाना ही खर्च
रेहड़ी संचालक बताते हैं कि उनकी दिनचर्या में रोज ही कमाना और फिर रोजाना ही खर्च करना होता है। रेहड़ियों पर लगे अधिकांश कारीगर तो ऐसे परिवारों से हैं, जो प्रतिदिन राशन ले जाने वाले हैं। शाम तक कमाया और फिर जाते समय राशन लेकर गए तो घर में भोजन बनता है। कुछ के पास जमा पूंजी भी है, लेकिन वह इतनी नहीं है कि एक सप्ताह भी गुजारा हो सके।
कोट
फास्ट फूड का काम शाम को 5 बजे के बाद ही तेजी पकड़ता है। मगर अब 6 बजते ही घरों को लौटना पड़ता है। मुश्किलें तो बढ़ गई हैं।
- बद्री, डोसा विक्रेता
अब तो दिन के समय जो ग्राहक आ रहे हैं, उन्हीं के सहारे काम चल रहा है। शाम को 6 बजने से पहले ही रेहड़ी घर ले जानी पड़ती है। रोज कमाना और रोज ही खर्च करना हमारी दिनचर्या है।
-सोमनाथ, गोलगप्पे विक्रेता
हमारे छोटे कारोबार का ध्यान रखे बिना ही प्रशासन ने पाबंदी लगा दी है। सात दिन से ज्यादा पाबंदी बढ़ी तो घर का गुजारा चलाना भी मुश्किल हो जाएगा।
- मोहनलाल, बर्गर विक्रेता
फतेहाबाद के पपीहा पार्क के बाहर लगी फास्ट फूड की रेहड़ियां।- फोटो : Fatehabad