फतेहाबाद। सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों और उससे पहले युक्तिकरण को लेकर विवाद जारी है। शिक्षा विभाग की ट्रांसफर ड्राइव से पहले युक्तिकरण की अपनाई गई नीति का जिले के कई स्कूलों पर असर पड़ने वाला है। जिले के कई मिडिल स्कूल सीनियर सेकेंडरी से जोड़े जा रहे हैं और यहां मिडिल स्कूल में हेड मास्टर के पद को खत्म कर दिया गया है। यानी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के प्रिंसिपल ही मिडिल स्कूल के इंचार्ज होंगे।
शिक्षा विभाग से मिली रिपोर्ट के मुताबिक गांव अहरवां के मिडिल कन्या स्कूल को सीनियर सेकेंडरी स्कूल से जोड़ा जा रहा है, यहां मिडिल स्कूल हेड मास्टर का पद खत्म कर दिया गया है। गांव बनगांव में भी इसी तरह से कन्या मिडिल स्कूल को सीनियर सेेकेंडरी से जोड़ा जा जा रहा है। गांव खैरातीखेड़ा और अलीपुरा बरोटा में भी मिडिल हेड के खत्म कर दिए गए हैं। यहां के स्कूलों को आपस में जोड़कर विद्यार्थियों की संख्या अनुसार पद तय किए गए है।
तो मिडिल हेड पढ़ाएंगे टीजीटी विषय
ट्रांसफर ड्राइव में रेशनेलाइजेशन का सबसे ज्यादा असर ईएसएचएम पर पड़ेगा। शिक्षा विभाग ने इनके पद कम कर दिए हैं। प्रमोशन से मिडिल हेड मास्टर बने शिक्षकों को स्टेशन ही नहीं मिले हैं। इसके चलते उन्हें ट्रांसफर ड्राइव में टीजीटी विषय के पद भरने पड़े हैं। यहां तक कि कई शिक्षकों को जिले से बाहर भी जाना पड़ सकता है।
शिक्षकों को ट्रांसफर मैसेज का इंतजार
ट्रांसफर ड्राइव में विकल्प भरने को लेकर शिक्षकों को वीरवार दोपहर एक बजे तक का समय दिया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा प्रेस वार्ता भी की गई। लेकिन देर शाम तक शिक्षकों को ट्रांसफर मैसेज का इंतजार रहा। ट्रांसफर ड्राइव में पीजीटी, टीजीटी, ईएसएचएम और प्रिंसिपल को शामिल किया गया है।
कोट
ट्रांसफर ड्राइव में रेशनेलाइजेशन के दौरान कई मिडिल स्कूलों को सीनियर सेकेंडरी और हाई के साथ जोड़ दिया गया है। कई स्कूल ऐसे है जिनमें आपस में काफी दूरी है। ऐसे में इंचार्ज को दिक्कत होगी। इसके अलावा जो अभी सेवानिवृत्त होने वाला है उन्हें भी मौका नहीं दिया गया है। सरकार को नीति में बदलाव करना चाहिए।
-रामेश्वर मताना, प्रदेश उपाध्यक्ष हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन
कोट
रेशनेलाइजेशन और ट्रांसफर की प्रक्रिया निदेशालय स्तर पर होनी है। उनके पास अभी तक कोई जानकारी नहीं आई है।
-दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी