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कई सरकार आई नहीं चली फतेहाबाद में रेल

Tue, 01 Jul 2014 11:52 PM IST
fatehabad
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हर वर्ष संसद भवन में जैसे ही रेल बजट पेश होता है, फतेहाबाद वासियों की नजर टीवी व अखबारों पर गड़ जाती है। लोगों को उम्मीद होती है कि इस बार फतेहाबाद के लिए कोई ना कोई ट्रेन की घोषणा रेलवे की ओर से अवश्य होगी। लेकिन आजादी के इतने साल बाद भी फतेहाबाद वासी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। हर बार चुनावों में नेता आते हैं।
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ट्रेन दिलाने का वादा करते हैं और सांसद बनने के बाद वह अपने वायदे भूल जाते हैं। इस बार रेल बजट आठ जुलाई को पेश होना है और फतेहाबाद वासियों को अपने नवनिर्वाचित सांसद से उम्मीद है कि इस बार वह संसद में फतेहाबाद की आवाज जरूर उठाएंगे। सांसद चरणजीत सिंह ने कहा कि उनकी पहली आवाज फतेहाबाद को रेलवे लाइन से जोड़ने के लिए उठेगी।

 उसके लिए चाहे उन्हें कुछ भी करना पड़े। वह अपने क्षेत्र की आवाज संसद भवन में अवश्य रखेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सरकार में फतेहाबाद रेलवे के नक्शे पर आ जाएगा। सांसद ने कहा कि पूर्व सांसद अशोक तंवर लोगों को गुमराह करते रहे हैं। अब तक उन्होंने रेलवे लाइन की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए। जबकि केंद्र में उनकी  ही सरकार थी।
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प्रधानमंत्री व रेलमंत्री कर चुके हैं घोषणा
 फतेहाबाद वासी लंबे समय से रेलवे की मांग कर रहे हैं। 1998 में तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एमएम कॉलेज में एक जनसभा में रेलवे लाने की बात कही थी। 2004 में अग्रोहा के मेले में तत्कालीन रेलवे मंत्री लालू प्रसाद यादव ने फतेहाबाद को रेलवे लाइन से जोड़ने की ‘घोषणा’ ही कर डाली थी। 2012 में सांसद डा. अशोक तंवर ने संसद में रेलवे बजट में फतेहाबाद को वाया अग्रोहा रेल लाइन के सर्वे की बात उठाई थी। वह अब तक कह रहे हैं कि उन्होंने सर्वे के लिए स्वीकृति प्रदान करवा दी है।  लेकिन कब सर्वे होगा, कहां होगा। यह किसी को नहीं पता।

जाखल व टोहाना से पकड़नी पड़ती है ट्रेन
फतेहाबाद के लोगों ने दिल्ली, जम्मू अथवा कहीं भी लंबी दूरी के लिए रेल से जाना हो तो उन्हें यहां से जाखल व टोहाना के जमालपुर से रेलगाड़ी पकड़नी पड़ती है। जाखल यहां से करीब 70 व टोहाना 60 किलोमीटर दूरी पर पड़ता है, ऐसे में आने जाने में ही भारी किराया व समय की बरबादी होती है।

ट्रकों से आता है माल
फतेहाबाद के व्यापारियों को दिल्ली से माल मंगवाने के लिए ट्रकों का सहारा लेना पड़ता है। जो काफी महंगा पड़ता है। इसके अलावा यहां से धान समालखां तरावड़ी कुरुक्षेत्र व करनाल जाता है। इसका भी काफी भाड़ा लगता है। यहां से गेहूं ट्रकों के माध्यम से अन्य स्थानों को जाता है। यहां पर चीनी, घी व खुदरा सामान ट्रकों के माध्यम से पहुंचता है, दिल्ली से यहां पहुंचते-पहुंचते सामान की कीमत दोगुनी हो जाती है।

दैनिक यात्रियों को होता है नुकसान
यहां से हिसार-सिरसा को जाने वाले कर्मचारी व व्यापारियों को प्र्रतिदिन 100 रुपये से ऊपर किराया अदा करना पड़ता है। जो महंगाई के इस दौर में असहनीय है। अगर रेल द्वारा यह सफर तय किया जाए तो 20 रुपये ही किराया लगेगा।

व्यापार मंडल, किसान क्लब वरिष्ठ नागरिक परिषद की मांग है कि फतेहाबाद को रेलवे लाइन से शीघ्र जोड़ा जाए। ताकि व्यापारी किसान व वरिष्ठ नागरिकों को फायदा हो सके। तीनों संगठनों ने कहा कि चुनावों के समय में रेलवे से जोड़ने का वायदा करने वाले सांसद अपना वायदा पूरा करें।
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