भूना। कारगिल युद्ध में वीरगति प्राप्त करने वाले शहीद ग्रेनेडियर मनोहर लाल मावलिया की फाइल फोटो।
भूना। कारगिल विजय दिवस उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देने का दिन है जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। गांव ढाणी डूल्ट के शहीद ग्रेनेडियर मनोहर लाल मावलिया की शहादत भी ऐसी ही अमर गाथा है।
शहीद के पिता रामेश्वर दास मावलिया और माता हरकोरी देवी बताते हैं कि मनोहर लाल बचपन से ही देश सेवा का सपना देखते थे। गांव से दसवीं तक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने 19 वर्ष की आयु में भारतीय सेना की वर्दी पहन ली। 13 जून 1999 की शाम कारगिल के द्रास सेक्टर में ऑपरेशन विजय के दौरान दुश्मनों से मुकाबला करते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
उनकी शहादत के केवल पांच दिन बाद बतौर लेफ्टिनेंट नियुक्ति पत्र घर पहुंचा जिसने पूरे परिवार को गर्व और भावुकता से भर दिया। आज भी परिवार के हर सदस्य के लिए मनोहर लाल केवल एक नाम नहीं बल्कि प्रेरणा हैं। उनके छोटे भाई राजेश कुमार, भाभी संतरो देवी, भतीजी मनीषा, महक, वीना और हीना तथा भतीजे जयंत के लिए वह हमेशा परिवार के सबसे बड़े नायक रहेंगे।
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ढाणी डूल्ट में शहीदों की स्मृति में बनेगा भव्य स्मारक, आज से शुरू होगा निर्माण
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर गांव ढाणी डूल्ट को बड़ी सौगात मिली है। गांव के शहीद मनोहर लाल मावलिया और शहीद कृष्ण कुमार सेवदा की स्मृति में स्मारक का निर्माण कार्य रविवार से शुरू होगा। जिला परिषद सदस्य रामनिवास उर्फ मिट्ठू झाझड़ा ने बताया कि दोनों वीर सपूतों ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनके सम्मान में जिला परिषद की ओर से स्मारक निर्माण के लिए ग्रांट स्वीकृत की गई है। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को शहीदों के अदम्य साहस, देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देगा तथा गांव के लिए गौरव का प्रतीक बनेगा।
भूना। कारगिल युद्ध में वीरगति प्राप्त करने वाले शहीद ग्रेनेडियर मनोहर लाल मावलिया की फाइल फोटो।