फतेहाबाद। लंपी पॉक्स का प्रकोप लगातार जिले के पशुओं में बढ़ता जा रहा है। सोमवार को लंपी पॉक्स बीमारी से सात गायों की मौत हो गई। वहीं 117 नए केस मिले हैं। राहत की बात यह भी है कि लंपी से बीमार पशु जल्द ठीक भी हो रहे हैं। पशुओं का रिकवरी रेट जहां 61 फीसदी तक पहुंच गया है, वहीं डेट रेट तीन फीसदी पर आ गया है। अब तक 985 पशु इस बीमारी से रिकवर हो चुके हैं, अब तक 22,200 पशुओं को वैक्सिन लगाई गई है।
वहीं लंपी के बढ़ते केसों को लेकर सोमवार को उपायुक्त ने अधिकारियों की मीटिंग लेकर उनको दिशा निर्देश भी दिए। उधर, लंपी की दूसरे चरण की डोज एक या दो दिन में आने की उम्मीद है। जिले में लंपी पॉक्स बीमारी गायों में पाई जा रही है। लगातार इसके केस बढ़ते जा रहे हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र टोहाना व रतिया हैं। पंजाब में पहले से ही यह बीमारी फैली हुई थी और पंजाब बॉर्डर के साथ लगते जाखल, टोहाना व रतिया में इसका प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। पशुपालन विभाग लगातार पशुपालकों को इस बीमारी के लिए सचेत कर रहा है।
बता दें कि सोमवार को लंपी पॉक्स बीमार से सात गायों की मौत हो गई। इनमें रतिया क्षेत्र में दो, गांव रहनवाली, रत्ताखेड़ा, रत्ताथेह, नांगली व भट्टू क्षेत्र के गांव बोदीवाली में एक-एक गाय की मौत हो गई। इसके साथ ही लंपी से मरने वाली गायों का आंकड़ा 48 तक पहुंच गया है। लंपी से मरने वाले पशुओं का डेथ रेट 3 तीन फीसदी तक पहुंच गया है। जिले में सोमवार को लंपी संक्रमित 117 पशु पाए गए हैं। अब तक जिले में लंपी के 1604 केस सामने आ चुके हैं।
जिले में जिस प्रकार लंपी पॉक्स संक्रमित पशु मिल रहे हैं, वहीं उनका रिकवरी रेट भी बढ़ रहा है। जिले में 1604 संक्रमित पशुओं में से 985 पशु ठीक हो चुके हैं। जिले में पशुओं का रिकवरी रेट 61 फीसदी है। 619 पशुओं का इलाज अभी जारी है।
डीसी ने ली अधिकारियों की मीटिंग
लंपी पॉक्स को देखते हुए सोमवार को डीसी प्रदीप कुमार ने अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में डीसी ने जिला में लंपी पॉकस बीमारी के बचाव व उपचार को लेकर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे पशुपालकों को लंपी स्किन बीमारी से बचाव व उपचार के बारे में जागरूक करें। उन्होंने शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में डेयरी वाले क्षेत्रों में नियमित रूप से फॉगिंग करवाने के निर्देश दिए ताकि इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके।
रतिया एसडीएम ने किया नंदीशाला का दौरा
उपमंडलाधीश डॉ. वीरेंद्र सिंह ने सोमवार को सहनाल रोड स्थित श्री शिव भोले नंदीशाला में लंपी स्किन रोग की रोकथाम के लिए अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि वायरस से संक्रमित पशु में पहले बुखार आना, खाल पर छोटी छोटी गांठें बनना, पशुओं में गले के नीचे, गादी, छाती व पैरों में सूजन आना जैसे लक्षण होते हैं। उन्होंने कहा कि उचित देखभाल व इलाज से बीमार पशु 10-15 दिनों में पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाता है पशुओं का घर द्वार पर टीकाकरण जारी है।
ये हैं इस बीमारी के लक्षण
1. इस बीमारी में पशु को तेज बुखार, मुंह से पानी गिरना, भूख नहीं लगना, दूध उत्पादन में गिरावट, पशु के शरीर पर गांठे बनना जोकि फूट कर जख्म भी बन जाता है।
ये हैं बीमारी के फैलाव के कारण
1. मक्खी-मच्छर व चीचड़ के माध्यम से, संक्रमित पशुओं की लार व दूषित चारा, पानी से फैलता है।
2. संक्रमित पशु के स्वस्थ पशु के संपर्क में आने से भी फैलती है।
ये पशुओं को इस बीमारी से बचाव के तरीके
1. पशुओं के बाड़े को सूखा व साफ सुथरा रखें, नियमित रूप से मक्सी व मच्छर रोधी दवाओं का प्रयोग करें
2. बीमार पशु के घावों की नियमित रूप से लाल दवाई व फिटकरी से सफाई करें।
3. बीमार पशु के दूध का सेवन केवल उबाल कर ही करें।
4. बीमार पशु के संपर्क में आने पर अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोयें।
5. संक्रमण को रोकने के लिए पशुओं का आवागमन बंद करें जैसे जोहड़, हौदी, मेलों आदि में न लेकर जाएं।
6. मृत पशु को खुले में न फेंके बल्कि 8 से 10 फीट गहरे गड्ढे में दबाएं।
7. बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
8. पशु में लंपी स्किन बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर अपने नजदीकी पशु अस्पताल में लेकर जाए और उसका उपचार करवाएं।
9. पशुपालक पशु को नीम के पतों से उबाले हुए गुनगुने पानी में थोड़ी से लाल दवाई डालकर उसको नहलाएं, जिससे पशु को आराम मिलेगा।
जिले में लंपी की स्थिति
संक्रमित पशु मिले 1604
ठीक हुए 985
उपचाराधीन 619
मौत 48
वैक्सीन लगी 22,200
कोट
प्राथमिक उपचार व सावधानी बरतने से इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है। पशु में लंपी स्किन बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो पशुपालक पशु को नीम के पतों से उबाले हुए गुनगुने पानी में थोड़ी से लाल दवाई डालकर उसको नहलाएं, जिससे पशु को आराम मिलेगा। इसी प्रकार घाव वाली जगह पर डेटॉल या फिनाइल लगाएं, ताकि जख्म और ज्यादा ना फैले।
-डॉ. सुखविन्द्र गिल, उपनिदेशक, जिला पशुपालन विभाग, फतेहाबाद।