जिले में चिकित्सा और एंबुलेंस सुविधाओं के अभाव में घायलों की जान पर बनी हुई है। फतेहाबाद की सीमा पर कई बार तो हादसा होने की स्थिति में घायलों को 30 किलोमीटर का सफर तय करके सामान्य अस्पताल लाया जाता है। यानी हादसा होने के लगभग एक घंटे बाद घायलों को इलाज मिलना शुरू हो पाता है। ऐसी दशा में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि घायलों की जान से किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है। शहर में आने जाने वाले वाहनों पर नजर रखने के लिए पुलिस ने चार चेक पोस्ट लगा रखे हैं। इन चेक पोस्ट पर सिर्फ दो मेडिकल वैन की तैनाती की गई है। इन मेडिकल वैन में एक कंपाउंडर और चार पुलिस वालों की तैनाती है।
दुघर्टना होने पर इन मेडिकल वैन की सहायता से घायलों को सरकारी अस्पताल पहुंचाया जाता है। मगर जहां-जहां ये चेक पोस्ट लगाए गए हैं वहां नजदीक कोई भी अस्पताल नहीं है, जिससे दस किलोमीटर दूर सिविल अस्पताल में ही घायलों को ले जाया जाता है, जबकि फतेहाबाद की सीमा 20 किलोमीटर तक फैली हुई है। सीमा पर हादसा होने की स्थिति में चेक पोेस्ट से वैन 10 किलोमीटर दूर हादसास्थल पर जाएगी और वहां से वापस 20 किलोमीटर दूर सिविल अस्पताल में आएगी। यानी कई केस में तो यह सफर 30 किलोमीटर तक तय करना पड़ता है, जोकि गंभीर घायल के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
इन-इन जगहों पर है चेक पोस्ट
फतेहाबाद के जीटी रोड पर धांगड, भोड़ा, फतेहाबाद और दरियापुर में चेकपोस्ट बनाई गई है। इनमें से दो जगहों पर मेडिकल वैन तैनात की गई है एक दरियापुर के पास और दूसरी धांगड के पास, जबकि फतेहाबाद की सीमा सिरसा और हिसार की तरफ 20 किलोमीटर तक है।
वाहनों की गति पर ध्यान
इन चेक पोस्ट पर मौजूद पुलिसकर्मी आने-जाने वाले वाहनों की गति पर ध्यान देते हैं। हाईवे पर गाड़ी की गति के संबंध में पुलिस ने जगह-जगह सांकेतिक बोर्ड लगाए हुए हैं। ये बोर्ड वाहन चालकों को निर्देश देते हैं कि आपके वाहन को किस गति पर चलाना है। शहर में भी वाहन की गति के संबंध में पुलिस ने सांकेतिक बोर्ड लगाए हुए हैं। हाईवे पर कार की गति 90 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। इसके अलावा बसों और ट्रकों की गति 60 से 65 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जबकि दुपहिया वाहनों की संख्या 40 से 50 किमी प्रति घंटा निर्धारित है।
संस्थाएं भी करती हैं जागरूक
सड़क पर हादसों के दौरान भाविप, रोटरी क्लब, लायंस क्लब जैसी संस्थाएं भी मदद करती है। फतेहाबाद में भाविप के सचिव ललित चोपड़ा ने बताया कि भाविप घायल व्यक्ति की हर संभव मदद देने की कोशिश करती है। भाविप की ओर से पहले एंबुलेंस की व्यवस्था की गई थी पर अब कुछ महीनों से एंबुलेंस सेवा बंद कर दी गई है। भविप की तरफ से सड़क हादसों में अंग खो चुके व्यक्तियों को कृत्रिम अंग दिए जाते हैं। समय-समय पर लोगों को सड़क यातायात के बारे में जागरूक करने के लिए शिविर भी लगाए जाते हैं।
इस साल हो चुके हैं 156 हादसे
इस साल की बात की जाए तो हाईवे पर हुए दुर्घटनाओं की संख्या ज्यादा है। नेशनल हाईवे पर अब तक कुल 156 हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में अब तक 52 लोगों की मौत हो चुकी है और 152 लोग घायल हो गए हैं।
पंद्रह से बीस मिनट लगते हैं पहुंचने में
सीएमओ एसबी कंबोज ने बताया कि हाईवे पर हादसे के बाद घायलों को यहां तक पहुंचने में 15 से 20 मिनट लग जाते हैं। सीएमओ ने बताया कि मेडिकल वैन और एंबुलेंस में घायल को इलाज देना शुरू कर देते हैं। मेडिकल वैन में ट्रेंड व्यक्तिहोता है जो फर्स्ट एड देना शुरू कर देता है। कई मरीजों की हालत ऐसी होती है कि उन्हें जल्द से जल्द इलाज मिलना चाहिए, देरी से जान भी जा सकती है।
यहां आती है दिक्कत
फतेहाबाद की भोड़ा चेकपोस्ट से अग्रोहा की दूूरी 10 किमी है और फतेहाबाद की दूरी 20 किमी है। ऐसे में अग्रोहा से तुरंत एंबुलेंस बुलाकर घायलों को ले जाया जाता है। दूसरी तरफ सिरसा के डिंग मोड़ की तरह कोई हादसा होता है तो वहां से सिरसा जाने में 30 मिनट और फतेहाबाद आने में 20 मिनट लगते हैं। ऐसे में दरियापुर के पास मेडिकल वैन को वहां जाने में 10 मिनट लगते हैं और फतेहाबाद वापस आने पर 20 मिनट और लग जाते हैं कुल मिलाकर आधा घंटा घायलों को लाने में लग जाता है।
कोट
पुलिस ट्रैफिक नियमों का पालन कराने और सड़क पर हादसों को रोकने के लिए पूरी तरह गंभीर है। अगर लोग यातायात के नियमों का पालन करेंगे तो हादसों में खुद कमी आ जाएगी। चेक पोस्ट पर पुलिस की 24 घंटे तैनाती रहती है। आने जाने वाले वाहनों पर नजर रखी जाती है। जरूरत पड़ने पर वाहनों की चेकिंग का अभियान भी चलाया जाता है।
- बहादुर सिंह, ट्रैफिक पुलिस इंचार्ज