समैन। ग्रामीण जीवन की सहज गति तब प्रभावित हो जाती है जब बुनियादी सुविधाएं बाधा बन जाएं। समैन गांव में इस समय परिवहन व्यवस्था की कमी और जल निकासी की खराब स्थिति ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल में डाल दिया है। गांव से नरवाना के लिए बस सेवा बेहद सीमित होने के कारण यात्रियों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ रहा है।
सुबह साढ़े 7 बजे एक बस के बाद अगली सीधी बस दोपहर ढाई बजे उपलब्ध होती है। इस रूट पर विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों की आवाजाही अधिक रहती है, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि नरवाना एक प्रमुख शैक्षणिक, व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र है, जहां कोर्ट, मंडी, कॉलेज और रेलवे स्टेशन स्थित हैं। ऐसे में बसों की कम संख्या से दैनिक आवागमन प्रभावित हो रहा है।
कई बार सुबह की बस छूट जाने पर यात्रियों को निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है या फिर अगले दिन तक इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि इस रूट पर कम से कम तीन से चार अतिरिक्त बस फेरे शुरू किए जाएं ताकि यात्रियों को आवागमन में राहत मिल सके।
दूसरी ओर गांव में हाईवे किनारे बने नालों की नियमित सफाई न होने से बारिश के दिनों में गंभीर स्थिति बन जाती है। नाले जाम होने पर पानी ओवरफ्लो होकर गलियों में भर जाता है जिससे बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। इससे आवागमन बाधित होता है और ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित होता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की गई लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लोगों ने मांग की है कि परिवहन व्यवस्था और जल निकासी प्रणाली दोनों में सुधार किया जाए ताकि गांव में सामान्य जीवन सुचारु रूप से चल सके।
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गांव समैन से नरवाना जाने के लिए बसों की कमी के कारण कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सुबह बड़ी संख्या में स्कूल के विद्यार्थी व कर्मचारी नरवाना जाना होता है। इस रूट पर सुबह एक ही बस नरवाना जाती है जिस कारण उसमें काफी भीड़ हो जाती है। परिवहन विभाग इस रूट पर बसों की संख्या बढ़ाए।
-फिरोज खान, दुकानदार।
गांव से दुकानदार सामान लेने के लिए नरवाना जाते हैं। यदि किसी कारण सुबह की बस छूट जाए तो उन्हें 500-600 रुपये खर्च करके निजी गाड़ी से नरवाना जाना पड़ता है जोकि बेहद खर्चीला है। उनकी सरकार से मांग है कि इस रूट पर बसों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि लोगों को इस समस्या से स्थायी छुटकारा मिल सके।
- महेंद्र जांगड़ा, मिस्त्री
गांव में नेशनल हाईवे के किनारे बने नालों की नियमित सफाई बेहद जरूरी है। मानसून सीजन शुरू होने वाला है। आने वाले दिनों में बारिश के कारण नालों का पानी ओवरफ्लो होकर गांव की गलियों में पहुंचना शुरू हो जाता है। यह पानी एक जगह जमा हो जाता है जिसमें मच्छर पनपने लगते हैं और लोगों का बीमार होने का खतरा बना रहता है।
- डॉ. मियां सिंह गिल, सेवानिवृत्त स्वास्थ्यकर्मी।
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सफाई न होने के कारण बारिश के दिनों में पॉलिथीन व कूड़ा कर्कट जमा हो जाता है। इस कारण गांव में गंदगी जमा हो जाती है। जिससे कई तरह की बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
- सतविंद्र गिल, युवा ग्रामीण।
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बारिश के सीजन से पहले नालों की सफाई जरूरी है। बारिश में पानी ओवरफ्लो होकर गांव की गलियों में चला जाता है, जिससे चारों तरफ गंदगी फैल जाती है। कई बार यह पानी घरों में भी घुस जाता है इसलिए उनकी जिला प्रशासन से मांग है कि इन नालों की नियमित रूप सफाई जरूर होनी चाहिए।
- बलिंद्र गिल, ग्रामीण।
नालों की नियमित सफाई बहुत जरूरी है। सफाई के अभाव में बारिश में नालों का पानी ओवरफ्लो होकर सड़क व गलियों में भर जाता है जिससे आसपास गंदगी फैल जाती है। यह पानी गलियों में एक जगह एकत्रित हो जाता है। जिसमें मच्छर पनपने का खतरा बना रहता है।
- दलबीर सिंह, पूर्व सैनिक।