अमर उजाला संवाददाता ने जिले में चल रही सीएचसी व पीएचसी में
कार्यरत स्टाफ की जानकारी जुटाई तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। कुलां,
पीरथला व मियौद की पीएचसी में एक भी डॉक्टर नहीं हैं।
फतेहाबाद
अस्पताल से रोटेशन के आधार पर डॉक्टर भेजे जाते हैं। ऐसे में अगर कोई
इमरजेंसी केस आ जाए तो उन्हें प्राथमिक उपचार मिलना भी संभव नहीं है।
नर्सिंग स्टाफ ही उसे फतेहाबाद रेफर करता है।
गौरतलब है कि पिछले
कुछ महीनाें में छह डॉक्टर पीजी करने के लिए फतेहाबाद जिले से जा चुके हैं।
वहीं फतेहाबाद व टोहाना के अस्पताल में दो-दो डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ दी
है।
सीएचसी व पीएचसी में स्टाफ के हालात
भूना में एक
एसएमओ व सात एमओ के पद स्वीकृत हैं। जिसमें पांच एमओ के पद खाली हैं। भट्टू
में एक एसएमओ व चार एमओ के पदों में तीन एमओ के पद रिक्त हैं। जाखल में एक
एसएमओ व सात एमओ के पद में से चार एमओ की पोस्ट खाली है।
वहीं
रतिया में एक एसएमओ व चार एमओ के पदों में से तीन एमओ के पद रिक्त पड़े
हैं। इसी प्रकार बनगांव, पीलीमंदौरी, बड़ोपल, एमपीरोही, झलनिया, नहला,
पिरथला, समैण, मामुपुर, मियौदकला, कुलां, भूतनकला, भिड़ाना व नागपुर समेत
14 पीएचसी है। इनमें कुलां, पिरथला व मियौद में डॉक्टर तक नहीं है।
नियमानुसार
एक पीएचसी में दो डॉक्टर, दो नर्सिंग स्टाफ, एक एएनएम, एक फार्मोसिस्ट, एक
लैब टैक्निशयन, दो सुपरवाइजर मेल व फीमेल तथा एक डेंटल सर्जन की पोस्ट
स्वीकृत है।
मगर हर सेंटर में स्टाफ कम हैं। जिले में दस
फार्मोसिस्ट व 20 लैब टैक्निशयन के पद स्वीकृत हैं लेकिन यहां पर
कांट्रेक्ट बेस में 19 कर्मचारी कार्यरत हैं।
कैसे हो इलाज 120 की जगह हैं महज 60 चिकित्सक
फतेहाबाद
जिले की सीएचसी व पीएचसी को मिलाकर कुल 120 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं।
बावजूद फतेहाबाद, टोहाना, भट्टू, रतिया, जाखल व भूना के अस्पताल सहित किसी
सेंटर पर स्टाफ पूरा नहीं है।
ऐसे में इलाज के लिए आने वाले
मरीजों को कई बार पास के सेंटर या अस्पताल जाना पड़ता है। यही वजह है कि
लोगों को मजबूरन निजी अस्पताल में जाकर इलाज करवाना पड़ता है।
सफाई का अभाव, पेयजल किल्लत
भूना
की सीएचसी में सात डॉक्टरों के पद स्वीकृत है। लैब टैक्निशयन की पोस्ट भी
खाली है। महिला चिकित्सक नहीं होने से महिला रोगियों को इलाज के लिए
फतेहाबाद जाना पड़ता है।
सीएचसी में सफाई का अभाव है। टॉयलेट व
बाथरूम गंदगी से अटे पड़े हैं। पीने के पानी तक की यहां कोई व्यवस्था नहीं
है। मरीजों के परिजनों को बाहर से पानी लाना पड़ता है।
निजी अस्पताल में इलाज करवाना मजबूरी
टोहाना
के अस्पताल में 11 मेडिकल ऑफिसर में से आठ के पद रिक्त हैं। बच्चे का इलाज
करवाने आई महिला रीना ने बताया कि जिले की सीएचसी व पीएचसी में डॉक्टर
नहीं होने के कारण मरीजों को मजबूरन प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज करवाना
पड़ता है।
मेहूवाला के रामस्वरूप, सुभाष ने बताया कि जिले में नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में यही आलम है।