फतेहाबाद। गांव कुम्हारिया के युवक अंकित जांगड़ा और विजय पूनिया का 50 दिन से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी परिवार से संपर्क नहीं हुआ है। रूस में फंसे 27 लोगों की सूची विदेश मंत्रालय जारी कर चुका है।
सोमवार को अंकित और विजय के परिवार सदस्य दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए। परिवार ने दोनों बच्चों को सरकार से वापस लाने की मांग रखी। विजय के परिवार से भाई, मामा, अंकित के परिवार से भाई और दोस्त व ग्रामीण शामिल हुए। अंकित के भाई रघुवीर ने बताया कि कई बार वह सरकार से अपील कर चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।
रूस गए दोनों को जबरन रशियन आर्मी में भर्ती कर यूक्रेन युद्ध में धकेल दिया गया है। परिजनों के अनुसार युवकों का पिछले करीब 50 दिन से ज्यादा समय से परिवार से कोई संपर्क नहीं हुआ है। आखिरी बार 11 सितंबर को अंकित का अपने भाई रघुवीर के पास मैसेज आया था।
अंकित के परिवार में उसके पिता रामप्रसाद, मां सुशीला देवी और बड़ा भाई रघुवीर है। अंकित के पिता रामप्रसाद राजमिस्त्री हैं, जबकि मां गृहिणी है। वहीं, इसी गांव के विजय के पिता का निधन हाे चुका है। अब परिवार में मां सुमन देवी और छोटा भाई सुनील कुमार है।
अंकित स्टडी वीजा पर 15 फरवरी 2025 को रूस गया था। परिवार ने कर्ज लेकर उसे वहां पढ़ने भेजा था। वहां उसने लेंग्वेज कोर्स में एडमिशन लिया था। पढ़ाई के साथ ही वह रेस्टोरेंट में काम करने लगा था। इसी तरह विजय पूनिया जुलाई 2024 में स्टडी वीजा पर गया। मार्च 2025 में वापस आ गया। इसके बाद बिजनेस वीजा पर जुलाई 2025 को वापस चला गया था। वह भी रेस्टोरेंट में काम कर रहा था।
विजय को वहां एक रूसी महिला मिली थी, जिसने कंप्यूटर ऑपरेटर या सिक्योरिटी गार्ड लगवाने का झांसा देकर रशियन आर्मी में भर्ती करवा दिया। 20 अगस्त को उन्हें रूस से यूक्रेन में ले गए। जहां मात्र 10 दिन की ट्रेनिंग देकर बंकरों में भेज दिया गया था। दोनों युवक वीडियो कॉल के जरिये परिवार के संपर्क में थे लेकिन 11 सितंबर के बाद संपर्क भी टूट गया।