मेेले में माौजूद भ्ाक्तगण्ा।
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जलियांवाले बाग च खून दियां नदियां वगियां, बहना रोंदिया जिन्ना दे वीर न आए मुड़ के, बल्ले बाबा खैरदीन तेरी कृपा मुकदी नी, तुंबा जिंदड़ी दा, सब दा सलाम पीरा मैरेया आदि गीतों से कविसर जत्थे, ढाड़ी जत्थे और कलाकारों ने जहां शहीदों की कुर्बानियों को याद दिलवाया, वहीं बाब खैरदीन की महिमा का वर्णन किया। मौका रहा, गांव हिजरावां में आयोजित टिब्बा बाबा मियां पीर खैरदीन के वार्षिक मेले का। मेले में आए कविसर जत्था बीबा सुरेंद्र कौर, जोगासिंह जोगी व मंगल मंघी यमला ने गीतों के माध्यम से बाबा की महिमा का गुणगान किया।
सुबह से शुरू हुए मेले में शाम तक हजारों की संख्या में पंजाब, हरियाणा व आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने बाबा की मजार पर मात्था टेककर मन्नत मांगी तथा चादरें चढ़ाईं। इस अवसर पर प्रबंधक कमेटी द्वारा कुश्ती व कबड्डी मुकाबले भी करवाए गए, जिसमें हरियाणा और पंजाब की चुनिंदा टीमों ने हिस्सा लिया। मुकाबलों में विजेता प्रतिभागियों को प्रबंधन कमेटी के प्रधान संतोख सिंह व अन्य सदस्यों ने इनाम देकर सम्मानित किया गया।
संतोख सिंह ने बताया कि जो कोई भी व्यक्ति सच्चे मन से और श्रद्धाभाव से आकर मन्नत मांगता है, बाबा उसकी मुराद अवश्य पूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सेवादारों द्वारा जगह जगह पर ठंडे और मीठे पानी की छबीलें लगाई गईं। बाबा का अटूट लंगर चलाया गया।
इस अवसर पर एसएस थिंद एडवोकेट, हरजतिंद्र सिंह जिंदी, बाबा काबुल सिंह, मास्टर लेखराज, जोगेंद्र सिंह जोसन, मास्टर गुलाब सुंडा, हंसराज, छिंद्रपाल, प्रेम कुमार, भजनलाल, रमेश, सोनू सामा, हंसराज व राधाकृष्ण ने मेला प्रबंधन में अपनी सेवाएं दीं। इस अवसर पर पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए हिजरावां कलां के बाबा खैरदीन लंगर कमेटी के सदस्य सरपंच कुलदीप सिंह, करनैल सिंह, दर्शन सिंह, मुख्तयार सिंह, भाल सिंह ने लंगर प्रबंधन में सहयोग किया।