गांव चंद्रावल के एक सैनिक का देहांत हो जाने के कारण बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। 24 राजपूत बटालियन कपूरथला में तैनात सूबेदार शैतान सिंह के नेतृत्व में सैनिक का पार्थिव शरीर चंद्रावल लाया गया।
जांबाज हवलदार सुरजीत शर्मा के शव को देखते ही गांव में मातम छा गया। तिरंगा में लिपेटे बेटे के शव को आंगन में देखकर 90 वर्षीय फूला देवी, पत्नी रोशनी देवी, बड़ी बेटी रितु, अलका, अंतरा इकलौते बेटा दीपक को गांव के लोगों ने ढांढस बंधाया।
नायब तहसीलदार जमित राय गर्ग, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी रविंद्र कुमार दलाल, समाज शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी कपूर सिंह, पटवारी देसराज कंबोज, ग्राम सचिव बलबीर सिंह, बलवान सिंह, अशोक कुमार, पटवारी राजेंद्र शर्मा, सरपंच महासिंह, पूर्व सरपंच महेंद्र सिंह, रिछपाल सिंह मोचीवाली से सैकड़ों लोगों ने सैनिक को पुष्प अर्पित करके श्रद्धांजलि दी।
अंतिम यात्रा में चंद्रावल व आसपास के सैकड़ों लोग शामिल हुए। सेना के टू गार्ड्स बटालियन हिसार की टीम के सूबेदार राजेश कुमार के नेतृत्व में शर्मा को राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी गई। सूबेदार शैतान सिंह ने बताया कि सैनिक हवलदार सुरजीत शर्मा बहादुर जवान थे।
कारगिल लड़ाई में मेजर रोहताश कुमार के नेतृत्व में दर्जनों घुसपैठियों को मारा था। कारगिल विजय के बाद सैनिक सरजीत शर्मा सिक्किम में चेन्नई बार्डर पर ड्यूटी पर भेज दिया गया था।
वहां पर सुरजीत के गले में इंफेक्शन हो गया था, जिसकी जांच के लिए उसे कोलकाता के आर्मी अस्पताल में दाखिल किया गया था। यहां सुरजीत शर्मा के गले में कैंसर बीमारी होनी पाई गई थी।
कैंसर बीमारी घोषित होने के बाद उसे 24 राजपूत बटालियन कपूरथला में ड्यूटी पर लगा दिया गया था लेकिन पिछले किई दिन से दिल्ली में उपचाराधीन था।
चंद्रावल निवासी सुरजीत शर्मा 1991 में 12वीं कक्षा पास करने के बाद सेना में भर्ती हो गया था। इसके बाद उन्होंने देश सेवा के लिए जगह-जगह ड्यूटी देकर दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे।
41 वर्षीय सैनिक के तीन बेटियां और एक बेटा है। दो बेटियों की शादी 24 नंवबर 2012 को की गई थी। छोटी बेटी अंतरा 12वीं कक्षा की छात्रा है।