सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर डीसी डॉ. नरहरि सिंह बांगड़ ने जिले में बाढ़ राहत योजना के तहत होने वाले प्रबंधन कार्यों की समीक्षा की। जिले में बाढ़ प्रबंधन के लिए तीन वित्त वर्षों अनुसार कुल 5 करोड़ 13 लाख 43 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। डीसी ने अधिकारियों को कहा कि राज्य सरकार द्वारा जिन योजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई है उन योजनाओं पर जल्द काम शुरू किया जाए। डॉ. बांगड़ ने कहा कि बाढ़ व सूखे से बचाने को प्रदेश में 245 करोड़ रुपये की 218 नई योजनाओं और जनस्वास्थ्य विभाग की 49.27 करोड़ रुपये की 6 योजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। उपायुक्त ने कहा कि बाढ़ नियंत्रण की चल रही विभिन्न अल्पावधि योजनाओं पर कार्य तेज किया जाए और इन योजनाओं को आगामी बरसाती सीजन से पहले पूरा कर लिया जाए। जिले में 8 मध्यम और एक दीर्घकालीन योजना पर काम किया जाएगा। नहर के तटों में कटाव न हो, इसके लिए भी विभाग अपने प्रबंध सुनिश्चित रखें।
डीसी ने कहा कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार लघु अवधि की योजनाओं को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसे निर्धारित अवधि में पूरा किया जाएं। डीसी ने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जिले में ऐसे क्षेत्रों से पानी की निकासी के लिए अलग से डीवाटरिंग योजनाओं का मसौदा तैयार करें ताकि जलभराव की समस्या से निपटा जा सके। सूक्ष्म सिंचाई पहल के तहत शुरू की गई योजना के लिए भी किसानों को प्रेरित करें। सरकार ने सूक्ष्म सिंचाई से हर खेत में पानी पहुंचाने के उद्देश्य से वेब पोर्टल डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट काडाहरियाणा डॉट एनआईसी डॉट आईएन भी लांच किया है। इस पोर्टल के माध्यम से किसान/डब्ल्यूयूए सूक्ष्म सिंचाई (एमआई) प्रणाली के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।