जिले में लगातार दूसरे दिन बारिश होने से किसानों के चेहरे लटक गए। बारिश से पूर्व पैराविल्ट, सडनविल्ट व सफेद मक्खी के प्रकोप के बाद नरमा में जलभराव होने से नरमा की फसल को नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग के अधिकारी भी इसकी पुष्टि करते हैं। भट्टू खंड व हाइवे के साथ लगते गांव में सर्वाधिक नुकसान है। डीसी ने किसानों से आह्वान किया है कि वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 72 घंटे के भीतर अपने मुआवजा के आवेदन संबधित खंड कृषि अधिकारी के कार्यालय में जमा करवा सकते हैं।
जानकारी अनुसार फतेहाबाद में बारिश न होने से नरमा की फसल पर सफेद मक्खी की बीमारी लग गई थी। उमस व गर्मी के कारण सफेद मक्खी का नुकसान बढ़ता गया। लंबे अंतराल के बाद वीरवार को फतेहाबाद में बारिश हुई तो पैराविल्ट व सडनविल्ट नामक बीमारी ने नरमा की फसल को घेर लिया। सफेद मक्खी की बीमारी से किसान उबरा नहीं था कि दो अन्य बीमारियों ने नरमा को अपनी चपेट में ले लिया। दो दिन पूर्व कृषि विभाग के अधिकारियों की टीम ने भट्टू खंड में जाकर सफेद मक्खी से खराब नरमा की फसल में खराबे का जायजा लिया तो पाया कि 60 फीसदी नरमा सफेद मक्खी ने चट कर दिया है। अब बारिश ने किसानों के जख्म पर नमक छिड़कने का काम किया है। शुक्रवार को दोपहर को फतेहाबाद में 24 एमएम बारिश दर्ज की गई। बारिश से भट्टू खंड के रामसरा, बोदीवाली पीलीमंदोरी, बनमंदोरी, दैय्यड़, मेहूवाला, सूलीखेड़ा व राजस्थान से सटे अनेक गांवों में जमकर बारिश हुई। ऐसे ही नेशनल हाइवे पर भोडा होशनाक, खाराखेड़ी, बड़ोपल, जांडली, गोरखपुर इत्यादि में काफी बारिश हुई। इन गांवों में किसानों ने नरमा की खेती कर रखी है। जहां पहले ही नरमा की फसल सफेद मक्खी, पैराविल्ट व सडनविल्ट नामक बीमारी की चपेट में है। अब यहां जलभराव होने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरे खींच गई।
इस बार 76,600 हेक्टेयर में बीजा गया है नरमा : प्रदेश सरकार ने भू-जल बचाने के लिए इस बार जिला में मेरा पानी, मेरी विरासत योजना चलाकर किसानों को धान की बजाय अन्य फसलों की बिजाई करने के लिए प्रोत्साहित किया था। जिस कारण नरमे का रकबा बढ़कर 76 हजार 600 हेक्टेयर हो गया, जबकि बीते वर्ष यह 66 हजार हेक्टेयर था। किसानों ने जैसे ही नरमे की ओर रुख किया तो 5 साल बाद फिर व्हाईट फ्लाई ने आक्रमण कर दिया। पहले बारिश ना होने से अब ज्यादा पैराविल्ट व सडनविल्ट प्रकोप भी नरमे को लग गया।
‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों का नरमे की फसल का बीमा है। इसमें जलभराव में भी किसानों को मुआवजा मिलेगा। इसके लिए बजाज एलियॉज बीमा कंपनी ने किसानों से 4077 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रीमियम राशि ली है। अगर किसान का सौ फीसदी नरमा नष्ट होता है तो उसे 81545 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा राशि मिलेगी।’ -डॉ. राजेश सिहाग डीडीए फतेहाबाद।
जिन किसानों का नरमा खराब हुआ है वह आज से अपने आवेदन दे सकते हैं : डीसी
डीसी डॉ. नरहरि सिंह बांगड़ ने किसानों से आग्रह किया है कि वह 72 घंटे के भीतर अपनी नरमा की फसल के खराबे का आवेदन संबंधित खंड कृषि अधिकारी के पास जमा करवा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि नरमा की फसल में जलभराव का ही मुआवजा मिलेगा। उन्होंने बताया कि शनिवार व रविवार को अवकाश होने के बावजूद जिले के सभी पांचों खंड कृषि अधिकारी के कार्यालय खुले रहेंगे और आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। सारे आवेदन आने के बाद कृषि व बीमा कंपनी की टीम संयुक्त रूप से नरमा की फसल में नुकसान का जायजा लेगी।