सामान्य अस्पताल के महिला वार्ड की छत गिरने से नवजात की मौत के मामले की जांच करने के लिए बीजेपी जांच कमेटी के सदस्य शनिवार दोपहर सामान्य अस्पताल पहुंचे। बीजेपी जांच कमेटी के सदस्य सीएमओ से मिलने की बजाय सीधा महिला वार्ड पहुंचे। वहां उन्होंने छत की हालत देखी और इस दौरान मृतक नवजात के पिता विनोद से भी मुलाकात की। जांच टीम को सामने देख नवजात का पिता विनोद जांच कमेटी के सदस्य सत्यरावल भादू के गले लगकर रोने लगा।
रोते हुए उसने अपने दो दिन के मृतक बेटे के लिए इंसाफ मांगा। इस दौरान जांच कमेटी से बातचीत में विनोद ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर कई गंभीर आरोप जड़े। दूसरी ओर, बीजेपी जांच कमेटी के सीधे महिला वार्ड का निरीक्षण करने और विनोद से मुलाकात की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सिविल सर्जन डॉ. अशोक चौधरी और डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. गिरीश मौके पर पहुंचे और जांच टीम के सामने विभाग का पक्ष रखा।
जांच टीम ने सिविल सर्जन को साथ लेकर महिला वार्ड में उन मरीजों से भी बात की जो हादसे के वक्त उसी वार्ड में मौजूद रहे। बाद में सिविल सर्जन डॉ. अशोक चौधरी जांच कमेटी के सदस्यों को अपने साथ कार्यालय में ले गए, जहां पर जांच टीम ने अस्पताल की रिपेयरिंग से संबंधित कागजात भी खंगाले। अस्पताल प्रशासन द्वारा उपलब्ध करवाए गए 2013 की रिपेयरिंग के कागजात से जांच टीम के सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। बहरहाल वे उन कागजात की फोटोकॉपी अपने साथ ले गए।
अस्पताल प्रशासन द्वारा बीएडंआर को दोषी ठहराने पर जांच टीम के सदस्यों ने सिविल सर्जन और अन्य अधिकारियों से सीधा सवाल दागा कि अगर आपके अस्पताल में कोई हादसा हो गया तो उसके लिए किसी और विभाग को कैसे दोषी ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो पत्र आपने हादसे के बाद लोक निर्माण विभाग को लिखा है, वह हादसे के पहले भी भेजा जा सकता था। इस बात का कोई जवाब अस्पताल प्रशासन के पास नहीं था। जांच टीम में जगदीश राय शर्मा, सत्यरावल भादू, राजेश चौधरी, धनंजय अग्रवाल और अनिल सिहाग शामिल रहे।
मामले की जांच शुरू की है। घटनास्थल देखा है, मृतक बच्चे के पिता से मुलाकात की है। अस्पताल प्रशासन का भी पक्ष सुना है। हालांकि, हादसे के दिन ड्यूटी पर तैनात नर्स के अवकाश पर जाने के चलते उससे बात नहीं हो सकी। इसलिए सोमवार को एक बार फिर अस्पताल का दौरा करेंगे। हालांकि अभी तक जो चीजें सामने आ रही हैं, उसमें प्रथम दृष्टया तो अस्पताल प्रशासन की लापरवाही दिख रही है, हालांकि कोई भी औपचारिक रिपोर्ट जांच होने के बाद ही दी जा सकेगी।