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मंडियों में ब्याज का धंधा बंद, करोड़ों की उधारी फंसी, संकट में कई आढ़ती

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फतेहाबाद अनाज मंडी। - फोटो : Fatehabad
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सरकार ने इसी वर्ष फसल की एवज में किसानों के खाते में सीधे रुपये डालने की व्यवस्था की है। सरकार के इस निर्णय ने आढ़ती व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन ला दिया। मंडियों में ब्याज का कारोबार बंद हो गया है। किसान के खाते में फसल की रकम आ जाती है। आढ़ती को उसका कमीशन मिल जाता है। हालांकि सरकार ने यह निर्णय अचानक लिया, जिससे काफी आढ़तियों को नुकसान भी हुआ है।
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बता दें कि बहुत सारे आढ़तियों ने किसानों को उधार रुपये दे रखे हैं। उधार राशि डूबने का जोखिम सता है। कई किसान रुपये देने से मुकर भी गए हैं। मगर अच्छी बात ये है कि अब लेनदेन साफ सुथरा हो गया है। पहले व्यवस्था ये थी कि फसल के रुपये आढ़ती के पास आते थे। आढ़ती अपनी उधार राशि काटकर किसानों को देते थे। यानी किसान आढ़ती के नियंत्रण में रहता था। अब किसानों पर आढ़तियों का नियंत्रण खत्म हो चुका है। अब किसानों की ईमानदारी पर तय है कि वह आढ़ती की उधार चुकाएगा या नहीं।
करीब 20 करोड़ रुपये उधार फंसी
किसानों का आढ़तियों के साथ वर्षों से लेनदेन चल रहा था। ज्यादातर किसान आढ़तियों के कर्जदार होते हैं। आढ़तियों को ब्याज वसूलना होता था। किसानों को आसानी से रुपये उधार मिल जाते थे। खाते में फसल के सीधे रुपये आने के बाद किसानों की मर्जी पर तय है कि वे रुपये चुकाएं या नहीं। ऐसे में आढ़तियों की उधार राशि फंस गई है। फतेहाबाद मंडी में कुल 134 दुकानें हैं। आढ़तियों का अनुमान है कि प्रत्येक दुकान की औसतन 15 लाख रुपये राशि फंसी हुई है। इस तरह करीब 20 करोड़ रुपये अटके हुए हैं।
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दो नंबर की बही खत्म
आढ़ती व किसान के बीच का लेनदेन दो नंबर की बही में लिखा जाता था। इस बही का लेखा जोखा सरकार को नहीं दिखाया जाता था। आढ़ती को यकीन होता था कि किसान फसल उसी के पास लेकर आएगा, इसलिए रुपये वसूलने मुश्किल नहीं थे। अब रुपये खाते में आने से दो नंबर की बही करीब खत्म हो चुकी है।
पर्ची व्यवस्था हुई बंद
खाते रुपये में आने के बाद पर्ची की व्यवस्था भी बंद हो चुकी है। पहले किसानों को पेस्टीसाइड, खाद, बीज या खल बिनौले भी खरीदने होते थे तो आढ़ती के पास जाता था। आढ़ती किसान को पर्ची बनाकर देता। पर्ची दिखाकर किसान सामान खरीदता था। छह महीने बाद हिसाब किया जाता था। दुकानदार और आढ़ती, दोनों ही ब्याज कमाते थे। अब यह पर्ची व्यवस्था भी बंद हो चुकी है।
आढ़ती दायर कर रहे रिकवरी केस
मंडी के एक आढ़ती ने झलनियां के किसान सत्यनारायण के खिलाफ 2.50 लाख रुपये रिकवरी का केस दायर किया है। इस तरह के काफी केस आ रहे हैं। आढ़ती किसानों से बकाया राशि वसूलना चाहते हैं। आढ़तियों ने किसानों से लाखों रुपये लेने हैं। किसान यह कहकर आनाकानी करते हैं कि ब्याज ज्यादा जोड़ा गया है।
सिर्फ भरोसेमंद किसानों से होगा लेनदेन : प्रधान
मंडियों में ब्याज का कारोबार लगभग बंद हो चुका है। अब आढ़ती सिर्फ उन्हीं किसानों से लेनदेन कर रहे हैं, जिनका व्यवहार अच्छा है। जो रुपये लेकर मुकरते नहीं हैं। हालांकि करोड़ों रुपये उधार राशि फंस चुकी है। आढ़तियों को नुकसान भी हुआ है। काफी किसान उधारी चुकाने से मुकर रहे हैं।
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-जगदीश भादू, प्रधान, व्यापार मंडल, अनाज मंडी, फतेहाबाद।
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