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महंगाई ने बिगाड़ा आमजन की थ्ााली का स्वाद

Thu, 07 Jul 2016 01:03 AM IST
fatehabad
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खाद्य पदार्थों और सब्जियों के बढ़े दामों ने बिगाड़ा स्वाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 महंगाई डायन का मुंह एक बार फिर से खुल गया है और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से लोगों का बजट गड़बड़ा गया है। हैरानी तो इस बात की है कि पिछले माह के मुकाबले इस माह लगभग प्रत्येक खाद्य पदार्थ एवं यहां तक की सब्जियों के दाम भी 30 से 40 फीसदी तक बढ़ गए हैं। दालों और चीनी जैसी आम जरूरत की वस्तुओं के दाम भी लगातार बढ़त की ओर हैं। रिटेल और थोक दोनों बाजारों में पिछले माह के मुकाबले कीमतों में तेजी देखी जा रही है।


चने की दाल और सफेद चने में लगी सबसे अधिक आग
थोक और रिटेल दोनों बाजारों में वैसे तो रसोई से जुड़ा सारा सामान काफी महंगा हो गया है लेकिन दालों में खासतौर पर बहुत बड़े पैमाने पर कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है। फतेहाबाद के रिटेल बाजार के अनुसार अरहर, चने की दाल, राजमा, काले चने और सफेद चनों मके दामों में तेजी आई । फिलहाल सिर्फ उड़द की दाल ऐसी रही है, जिसमें पिछले माह के मुकाबले कीमत में कमी देखी गई है।
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चने की दाल में तो पिछले माह के मुकाबले लगभग 25 रुपये प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई है। पिछले माह तक 70 से 72 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चने की दाल अब 95 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसी प्रकार सफेद चने के दामों में भी 20 रुपये किलो की बढ़ोतरी हुई है। पिछले माह के 100 रुपये किलो के मुकाबले अब सफेद चना 120 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। इसके अलावा अरहर, राजमा, काले चने में भी 10 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

दालें    वर्तमान दाम प्रति किलो        एक माह पहले के दाम प्रति किलो
अरहर    150                140
उड़द    150                170
चना    95                70
राजमा    90                80
काले चने 90                80
सफेद चने  120            100
सरसों तेल  90                87
रिफाइंड       75                71-72
देसी घी    360                340  (पैकेट वाला)
चीनी    40-41            38-39

त्यौहार के मुकाबले अब ज्यादा महंगी हो गई सब्जी
खाद्य पदार्थों के अलावा सब्जी की बात की जाए तो पिछले माह निर्जला एकादशी पर भी सब्जी के दामों में इतनी तेजी नहीं थी, जितनी तेजी आज देखी जा रही है। कीमतों में बढ़ोतरी की बात की जाए तो सबसे अधिक आलू, प्याज, टमाटर और घिया में रेट बढ़े हैं। टमाटर जहां पिछले माह 28 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे थे, जबकि अब टमाटर 40 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं।

इसी तरह आलू भी आम आदमी की पहुंच से बाहर जाता दिख रहा है। 13 रुपये में बिक चुका आलू अब इस माह 20 रुपये प्रति किलो से कम में नहीं मिल रहा है। इसी तरह बैंगन और घिया जैसी सब्जियों में भी प्रति किलो छह से सात रुपये की बढ़ोतरी देखी गई है। प्याज भी पिछले माह के मुकाबले दुगने रेट पर पहुंच चुका है। पिछले माह सात रुपये प्रति किलो बिका प्याज इस माह 15 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

सब्जी    वर्तमान    दाम    एक माह पहले का दाम
आलू    20        13
टमाटर    40        28
प्याज    15        07
बैंगन    14        10
घिया    20        12


खाद्य पदार्थों के थोक दामों में आया अंतर    
दालें    वर्तमान दाम प्रति किलो        एक माह पहले के दाम प्रति किलो
अरहर    144                136
उड़द    145                164
चना    88                67
राजमा    83                74
काले चने  88                77
सफेद चना  114            95
सरसों तेल  84                82
रिफाइंड       71                69
चीनी    38                37

उपभोक्ता परेशान, जेब पर बढ़ रहा है बोझ

पिछले माह के मुकाबले प्रत्येक वस्तु के दाम बढ़ गए हैं। चाहे वो दालें हों या फिर चीनी। सब्जियों के दाम तो त्यौहारों से भी ऊपर भी चढ़ गए हैं। ऐसे में रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। सरकार न जाने कब इस दिशा में कदम बढ़ाएगी, जिससे आम आदमी को राहत मिल सके।
खेमचंद मदान, उपभोक्ता ।

लगातार बढ़ती कीमतों से घर का बजट बिगड़ता है। हर बार कुछ निश्चित रकम रसोई के सामान के लिए निर्धारित करते हैं, लेकिन दुकान पर जाते ही सारी रकम खर्च भी हो जाती है। लगभग 25 से 30 फीसदी सामान खरीदना बाकी रह जाता है। पिछले तीन-चार माह से यही चल रहा है। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
मोहित कुमार, उपभोक्ता ।


दुकानदारों की राय, हमें ही महंगा मिले, तो कैसे करें समाधान

सभी प्रकार की दालें एवं अन्य खाद्य पदार्थ प्रति माह होलसेल में लेते हैं। अब पीछे से ही अगर दामों में बढ़ोतरी हो, तो दुकानदार को भी मजबूरी में बढ़े हुए दामों में पर बेचना पड़ता है। हमारे लिए तो ये मजबूरी है। हालांकि कई बार उपभोक्ताओं को समझाना मुश्किल हो जाता है।
प्रिंस बजाज, संचालक बजाज किराना स्टोर ।

रेट बढ़ाना-घटाना हमारे हाथ में नहीं है। ये तो पीछे से तय होते हैं। जब पीछे से माल सस्ता मिलेगा, तो उपभोक्ताओं को अपने आप सस्ता कर देते हैं। अब जब रेट बढ़े हैं, तो रेट बढ़ाकर बेचना हमारी भी मजबूरी है।
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पंकज फुटेला, संचालक पंकज वेरायटी स्टोर।

सप्लाई में कमी, मांग में तेजी से बढ़ी हैं कीमतें : थोक विक्रेता
जिस तरह से दालों और खाद्य पदार्थों की मांग में बढ़ोतरी हुई है। सप्लाई में उस रफ्तार से बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। कीमतों के बढ़ने का ये भी एक बड़ा कारण है। अगर सप्लाई बढ़ जाए तो कीमतों में कमी आने के आसार हो सकते हैं।
रमेश कुमार, होलसेल विक्रेता ।
 
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