मुकेश खुराना। बरसात का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में जगह-जगह जलभराव की समस्या पैदा हो चुकी है। जब जलभराव होगा, तो मच्छर पैदा होंगे और फिर बीमारियां फैलनी शुरू होगी। लेकिन इन सब के बीच स्वास्थ्य विभाग अभी खुद ही बीमार पड़ा है। कहने को तो जिले भर में सीएचसी-पीएचसी हैं, लेकिन वहां पर बीमारियों से लड़ने के लिए दवाइयों का स्टॉक ही नहीं है और डॉक्टरों का टोटा सो अलग। ऐसे में दावे करने वाला स्वास्थ्य विभाग कैसे बीमारियों से लड़ेगा, ये अपने आप में बड़ा सवाल है। सिविल सर्जन डॉ. अशोक चौधरी का कहना है कि फॉर्मासिस्टों को दवाइयों का स्टॉक रखने के आदेश दे दिए गए हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए आयरन की गोलियां तक नहीं:
ये जानकर हैरानी होगी कि सिविल अस्पताल की डिस्पेंसरी में गर्भवती महिलाओं के लिए आयरन की गोलियां तक नहीं है। यूं तो स्वास्थ्य विभाग नौ जुलाई को प्रधानमंत्री मातृत्व अभियान की शुरुआत करने जा रहा है। इसमें गर्भवती महिलाओं की जांच की जाएगी। लेकिन इधर पिछले काफी समय से सिविल अस्पताल फतेहाबाद की डिस्पेंसरी में आयरन की गोलियां, आयरन सिरप और फोलिकएसिड की दवाई ही नहीं है।
गर्भवती महिलाओं को बिना दवाई के ही बाहर से वापस लौटाया जा रहा है। अस्पताल के अधिकारी भी मानते हैं कि पिछले काफी समय से आयरन की दवाई की सप्लाई नहीं हुई है। अधिकारियों की माने तो पूरे हरियाणा में आयरन की दवाईयों का टोटा चल रह है।
बिना डॉक्टरों और दवाइयों के कैसे लड़ेगा बीमारियों से जंग
संक्रामक बीमारियों से लड़ने के लिए सरकार बेशक खुद को अलर्ट बता रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। जिले के अस्पतालों की बात करें, तो यहां पर 128 पदों में से केवल 44 पदों पर ही डॉक्टर कार्यरत हैं। छह पदों पर डिप्टी सिविल सर्जन ही नहीं है। पीएचसी, सीएचसी लेवल पर अभी तक बीमारियों से लड़ने के लिए दवाइयों का स्टॉक भी नहीं पहुंचा है।
तू-तू मैं-मैं के बीच एक साल से लगा है कूड़े का ढेर:
सिविल अस्पताल में तू-तू मैं-मैं के बीच पिछले एक साल कूड़े का ढ़ेर लगा हुआ है। नगर परिषद का कहना है कि अस्पताल के अंदर के कूडे़ का वह नहीं उठाएंगे और जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कचरे को उठाने का काम नगर परिषद का है। मामला उपायुक्त के सामने भी उठ चुका है, लेकिन कोई हल नहीं निकला है। अब नतीजा यह निकल रहा है कि अस्पताल के इस कचरे में बच्चे तक हाथ मारते हैं। इस कचरे के ढ़र से बीमारियाें के फैलने का डर बना है।
मरीजों की परेशानी उन्हीं की जुबानी:
दो दिन से वार्ड में दाखिल हैं, लेकिन यहां पर पीने का पानी का कोई प्रबंध नहीं है। पीने के पानी के लिए नीचे जाना पड़ता है।
मरीज रेशमा
वार्ड में पंखे लगे हैं, जो गर्म हवा देते हैं। यूं तो कूलर भी लगे हैं, लेकिन वह ज्यादातर समय बंद ही रहता है।
मरीज पुष्पा
डॉक्टर को दिखाने के लिए सुबह आठ बजे आई थी। अब 12 बजे हैं, लेकिन अभी तक नंबर नहीं आया है।
मरीज लाडो भोडिया
फिजीशियन को दिखाने के लिए आई थी, लेकिन सुबह से गर्मी में बैठी हूं। तीन घंटे बाद भी कह रहे हैं कि एक घंटा और लगेगा
मरीज चमेली भाटिया कालोनी
विभाग के दावे हैं तैयार हम
मानसून में अब बीमारियां भी फैलेंगी। मैंने सभी फार्मासिस्ट की मीटिंग लेकर पीएचसी और सीएचसी पर दवाइयों के प्रबंध करने को कह दिया है। सभी पीएचसी और सीएचसी पर दस्त की दवाई, ग्लूकोज, ओआरएस, जिंक, एंटीबायोटिक आदि दवाइयां पहुंचा दी जाएंगी। आयरन की गोलियां पीछे से न आने के कारण दिक्कत आ रही है। इस बारे में ऊपर लिखा गया है, जल्द ही पहुंच जाएंगी।
डॉ. अशोक चौधरी
सिविल सर्जन फतेहाबाद
11 जुलाई से 23 जुलाई तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा चलाया जा रहा है। आंगनबाडी वर्कर घर-घर जाकर ओआरएस, जिंक की गोलियां 0 से पांच साल के बच्चे को देंगी। माताओं को भी जागरूक किया जाएगा कि वह बच्चे को हर आधे घंटे बाद स्तनपान करवाएं। महिलाओं को घर पर ओआरएस का घोल तैयार करने बारे भी बताया जाएगा। स्कूलों में जाकर भी बच्चों को जागरूक किया जाएगा।
डॉ. सुजाता बंसल
डिप्टी सिविल सर्जन फतेहाबाद
खाने-पीने का रखे ध्यान:
इस मौसम में दूषित पानी से डेंगू व मलेरिया हो सोकता है। खाने-पीने का विशेष ध्यान रखें खासकर ठंडे-गर्म का।इंफेक् शन होने पर जुखाम हो सकता है और फिर खासंी भी हो सकती है जो लम्बे समय तक रह सकती है। अस्थमा व सांस की बीमारी के मरीज को अटैक ज्यादा होने का खतरा बना रहता है ऐसे में इसके मरीज खासकर ध्यान रखें।
डा.मनीष टुटेजा
छाती रोग विशेषज्ञ