फतेहाबाद के दिग्गज दिवंगत नेता और प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री मनीराम गोदारा के परिवार में संपत्ति का विवाद अब कोर्ट-कचहरी तक पहुंच गया है। बुधवार को पूर्व गृहमंत्री मनीराम गोदारा की पुत्रवधू वीना गोदारा की याचिका पर कोर्ट ने धोखाधड़ी के एक मामले में पूर्व गृहमंत्री के पोते, उसकी पत्नी सहित 8 नामजद और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है।
आरोपियों में रतिया के तत्कालीन तहसीलदार पृथ्वी सिंह, नायब तहसीलदार कर्णसिंह, फीता कानूनगो राजेंद्रे, पटवारी मदन, नंबरदार बलविंद्र, जगराज सिंह व अन्य भी शामिल हैं। मामला रतिया में गोदारा परिवार के एक पेट्रोल पंप से जुड़ा हुआ बताया गया है। शिकायतकर्ता वीना गोदारा पूर्व गृहमंत्री मनीराम गोदारा के छोटे बेटे लोकराज की विधवा हैं, जबकि आरोपी बनाए गए सुधीर गोदारा मनीराम गोदारा के बड़े बेटे पृथ्वी गोदारा के बेटे हैं। सुधीर गोदारा बीते विधानसभा चुनावों में भाजपा टिकट के दावेदार भी थे। रतिया पुलिस ने इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ राज फिलिंग स्टेशन रतिया की 18 मरले जमीन अपने नाम करवाने के आरोप में केस दर्ज कर लिया गया है।
कोर्ट में डाली याचिका के अनुसार वीना गोदारा ने बताया कि रतिया में राज फिलिंग स्टेशन फर्म में शुरू में ही चार हिस्सेदार पृथ्वीराज, लोकराज, शांतिदेवी पत्नी मनीराम गोदारा, सज्जन कुमार पुत्र बालूराम थे। मनीराम गोदारा के बेटे पृथ्वीराज के निधन के बाद यह पार्टनरशिप डीड समाप्त हो गई और एक नई डीड तैयार की गई जिसमें वरुण पुत्र लोकराज, सुनील, सुधीर पुत्र पृथ्वीराज इस पार्टनरशिप डीड में जोड़े गए। सभी हिस्सेदारों का 25-25 फीसदी पैसे हिस्सा था। इस बीच 2008 मेें सुनील की मौत हो गई और हिस्सेदारों ने बुढलाडा रोड स्थित पेट्रोल पंप बंद कर दिया। वीना गोदारा ने कोर्ट में डाली याचिका में आरोप लगाया है कि उसे हाल ही में पता चला कि सुधीर गोदारा ने अपने पिता की फर्जी वसीयत तैयार की है जिसमें पेट्रोल पंप की सारी जमीन सुधीर के नाम दिखाई गई है। इस वसीयत पर रामेश्वर व महेन्द्र ने गवाह के तौर हस्ताक्षर किए हैं। आरोप है कि पृथ्वी गोदारा की मौत के 5 वर्षो बाद यह वसीयत तत्कालीन तहसीलदार के सामने पेश हुई और नायब तहसीलदार कर्णसिंह ने इसे 15 अगस्त 2006 को रजिस्टर्ड कर दिया।
नंबरदारों बलविन्द्र व जगराज ने इस मामले में गवाही दी। इसी वसीयत के आधार पर उन्होंने कन्वेंस डीड करवा ली और 14 मार्च 2016 को इस कन्वेंस डीड का इंतकाल भी कर दिया गया। जब यह प्रॉपर्टी सुधीर के नाम हो गई तो 18 जुलाई 2016 को उसने पेट्रोल पंप की 18 मरले जमीन अपनी पत्नी सुमनेश के नाम कर दी। इस रजिस्ट्री में भी नंबरदार व गांव के रामेश्वर ने गवाही दी। तहसीलदार ने 29 जुलाई 2016 को सुमनेश गोदारा के नाम इतकांल कर दिया।
वीना गोदारा का आरोप था कि मै. राज फिलिंग स्टेशन फर्म शुरू से आखिर तक पार्टनरशिप फर्म रही । पूर्व गृहमंत्री के पोते सुधीर गोदारा इसमें 25 फीसदी के हिस्सेदार थे, लेकिन उन्होंने अधिकारियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी से सारी जमीन अपने नाम करवा दी। इसके बाद कोर्ट ने पक्ष सुनने के बाद रतिया पुलिस को निर्देश दिया कि इस मामले में सभी उपरोक्त आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी की आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए।