फतेहाबाद। पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल सवा साल से अधिक समय से समाप्त हो चुका है, ऐसे में गांवों के विकास का जिम्मा पंचायती राज अधिकारियों के हाथ में है। लेकिन विडंबना देखिए कि प्रदेश के पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली के गृह जिले में ही पंचायती राज से जुड़े अधिकारियों का टोटा बना हुआ है। फतेहाबाद के डीडीपीओ को तीन जिलों का कार्यभार मिला हुआ है। उनके अधीनस्थ अधिकारी संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में गांवों में विकास कार्य कछुआ गति से चल रहे हैं।
दरअसल, फतेहाबाद जिले में डीडीपीओ बलजीत सिंह चहल की नियुक्ति की गई थी। उनकी नियुक्ति के बाद ही उनको सिरसा के डीडीपीओ का अतिरिक्त कार्यभार दे दिया गया। वह सवा साल से सिरसा के डीडीपीओ का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं, वहीं तीन महीने पहले उनको हिसार का भी अतिरिक्त कार्यभार दे दिया गया। तीन जिलों का अतिरिक्त कार्यभार मिलने के कारण डीडीपीओ कभी हिसार, कभी सिरसा तो कभी फतेहाबाद ही दौड़ते रहते हैं। ऐसे में जो विकास के काम जिले के गांवों में होने चाहिए, उनकी रूपरेखा तक तैयार नहीं हो पा रही है। संवाद
260 ग्राम पंचायतों में सिर्फ 51 ग्राम सचिव तैनात
प्रदेश में फरवरी 2021 को पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल पूरा हो गया था। पहले ग्रामीण विकास का जिम्मा सरपंचों के पास था, लेकिन जब से उनका कार्यकाल समाप्त हुआ है, तब से ग्रामीण विकास का काम अधिकारी व उनके अधीन कर्मचारी देख रहे हैं। गांवों के विकास की रूपरेखा बनाने वाले ग्राम सचिवों के जिले में 94 पद हैं, लेकिन यहां पर केवल 51 ग्राम सचिव ही तैनात किए गए हैं। जिले में 260 ग्राम पंचायतें हैं। ऐसे में अधिकांश ग्राम सचिवों को चार से पांच गांवों का काम देखना पड़ता है, जिस कारण ग्रामीणों के समय पर काम नहीं हो पा रहे। यही नहीं जिले के सात खंडों में पंचायती राज के केवल दो ही पटवारी तैनात हैं, जो भूना व फतेहाबाद में ड्यूटी करते हैं। अन्य पांच खंडों में ब्लॉक पटवारी न होने के कारण भी ग्रामीणों के कई काम अटक रहे हैं।
कंडम वाहन, बीडीपीओ की कमी
जिले में फतेहाबाद, रतिया, भूना, भट्टूकलां, टोहाना, जाखल व नागपुर खंड हैं, जहां पर बीडीपीओ बैठते हैं। इनमें दो खंडों भूना व फतेहाबाद में बीडीपीओ का स्थायी पद नहीं है। यहां पर एचसीएस पद के अधिकारियों को अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। वहीं नागपुर खंड को हाल ही में बनाया गया है, लेकिन बीडीपीओ को अभी तक सरकारी वाहन मुहैया नहीं हो पाया है। जिन बीडीपीओ के पास गाड़ी है, वह कंडम हो चुकी हैं। पंचायत राज विभाग के एसडीओ को भी गाड़ियां नहीं मिल रही, जिस कारण वह गांवों में जाकर स्थितियों का जायजा नहीं ले पा रहे हैं।
बारिश के मौसम में बढ़ी परेशानी
ग्राम सचिव एसोसिएशन के राज्य कार्यकारिणी सदस्य अमन कुमार का कहना है कि अधिकारियों की कमी व संसाधन न होने के कारण गांवों में विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से तो बारिश के इस मौसम में गांवों में जल निकासी का है। इसके अलावा गांवों में बुनियादी सुविधाएं भी बाधित हो रही हैं और मनरेगा का काम भी रुका हुआ है। ग्राम सचिवों को हाईटेक करने के लिए 12 सॉफ्टवेयर दिए गए, जो एमटेक लेवल के लोग कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए भी न तो ग्राम सचिवों को मोबाइल दिए जा रहे हैं और न ही लैपटॉप व इंटरनेट। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की कमी के कारण ग्रामीणों को अनेक कामों के लिए शहरों का रुख करना पड़ रहा है।
कोट
पंचायती राज के अधिकारियों की कमी के कारण गांवों में विकास के रथ का पहिया रुका हुआ है। गांवों में कई बड़े प्रोजेक्ट अभी भी पूरे नहीं हुए हैं। अगर अधिकारी पूरे हों तो गांवों का विकास निर्बाध गति से हो सकता है।
-डॉ. दलबीर सिंह, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि, गांव पिरथला
कोट
गांवों के कुछ काम तो संबंधित बीडीपीओ से मिलकर करवा लिए जाते हैं, लेकिन बड़े अधिकारियों के न होने के कारण गांवों में सड़कों आदि के मरम्मत का काम नहीं हो पा रहा है। सवा साल से अधिक समय से पंचायती चुनाव नहीं हुए हैं। अधिकारी भी काफी कम हैं, इसलिए गांवों में विकास नहीं हो रहा।
-वीरेंद्र सिंह, पूर्व सरपंच, ललौदा
कोट
फतेहाबाद के डीडीपीओ के पास सिरसा का ही अतिरिक्त कार्यभार है। उनसे हिसार का कार्यभार लेकर जींद के डीडीपीओ को सौंप दिया गया है। ग्रामीण विकास के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं। अधिकारियों व कर्मचारियों की कमी को भी पूरा करेंगे।
-देवेंद्र सिंह बबली, विकास एवं पंचायत मंत्री, हरियाणा सरकार