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हेपेटाइटिस सी : 4448 मरीज हो चुके ठीक, हेपेटाइटिस बी का उपचार भी होगा निशुल्क

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नागरिक अस्पताल में मरीज की जांच करते फिजीशियन डॉ.मनीष टुटेजा। - फोटो : Fatehabad
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हेपेटाइटिस सी जिला में कभी एक महामारी का रूप ले चुकी थी। सर्वे के दौरान में प्रदेश में कैथल व जींद के बाद जिले में सबसे ज्यादा मरीज जिले में पाए गए। उपचार के लिए जिले के हजारों मरीज 2017 से पहले पिछले सात साल से जंग लड़ रहे थे। जिला के मरीजों को कभी रोहतक पीजीआई के चक्कर काटने पड़ रहे थे तो कभी महंगी दवाइयां लेकर उपचार करवाना पड़ रहा था। जिला की बहुप्रतीक्षित मांग को को पूरा करते हुए सरकार की जिला स्तर पर फरवरी 2017 में शुरू की गई योजना रंग लाई और साढ़े तीन साल में 4662 रजिस्टर्ड हुए इसमें से 4448 मरीज ठीक हो चुके हैं। 214 मरीजों का फिलहाल उपचार चल रहा है। इन मरीजों को कभी रोहतक पीजीआई में चक्कर लगाने पड़ रहे थे। नागरिक अस्पताल में फीजिशियन डॉ.मनीष टुटेजा और तत्कालीन फीजिशियन डॉ.अजय चुघ की देखरेख में इन मरीजों का उपचार चला। मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से फरवरी 2017 से अब तक निशुल्क टेस्ट और उपचार की सुविधा दी जा रही है। हेपेटाइटिस बी का उपचार जिला में निशुल्क शुरू होने जा रहा है।
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रतिया में पाए गए सबसे ज्यादा मरीज
करीब 10 साल पहले रतिया व उसके आसपास के क्षेत्र में काला-पीलिया के आशंकित मरीज सामने आने लगे थे। सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को सर्वे के आदेश जारी किए थे। रतिया में सर्वे के दौरान करीब 15 सौ मरीज सामने आए और बढ़ते चले गए। इस दौरान रोहतक पीजीआई में उपचार शुरू हुआ था। यहां पर कुछ श्रेणी के लोगों के लिए ही उपचार निशुल्क था। अन्य मरीजों का उपचार लाखों रुपये में था। मुख्यमंत्री मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के सामने रतिया के लोगों ने मांग उठाई थी, जिसके बाद जिला अस्पताल में मरीज का उपचार शुरू किया है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक रतिया, हमजापुर, बुर्ज, बीराबदी, टोहाना, कुलां, अकांवाली, झलनियां, एमपी सोतर, टिब्बी, अयाल्की, नहेड़ी, समैन, चिम्मो, इंदाछुई, बिलासपुर, हिजरावां खुर्द, अहरवां, घासवां, नागपुर, बहबलपुर, नथवान, रत्ताखेड़ा, भिरड़ाना, धीड़, हसंगा, जमालपुर, जल्लोपुर, कमाना समेत जिले के कई गांवों में हेपेटाइटिस सी के मरीज पाए गए।
जल्द नजर नहीं आते लक्षण : डाक्टरों के अनुसार हेपेटाइटिस सी वायरस के लक्षण पांच से लेकर सात सालों के बाद नजर आते हैं। क्षेत्र में सर्वे के दौरान सामने आया था कि आरएमपी डाक्टरों ने इलाके में कई लोगों को एक ही सिरिंज से टीके लगाए जिससे हेपेटाइटिस सी वायरस (एससीवी) एक से दूसरे में चला गया। इस वायरस ने महामारी जैसा रूप ले लिया। रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे के दौरान करीब 5213 सैंपल लिए इनमें 1465 सैंपलों में हेपेटाइटिस सी वायरस पॉजिटिव मिला।
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अब हेपेटाइटिस बी का उपचार मिलेगा निशुल्क : अब तक जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस सी का निशुल्क उपचार और टेस्ट हो रहे हैं। अब स्वास्थ्य विभाग हेपेटाइटिस बी का भी निशुल्क उपचार और टेस्ट की सुविधा शुरू करने जा रहा है। इसके लिए विभाग ने मुख्यालय से 100 कूपन मांगे। कूपन आने के बाद यहां पर हेपेटाइटिस बी का उपचार शुरू हो जाएगा।
हेपेटाइटिस सी के मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है। नागरिक अस्पताल में हेपेटाइटिस-सी मरीजों का उपचार व टेस्ट निशुल्क किया जाता है। तीन माह तक मरीजों को दवाई खानी पड़ती है। दवा व टेस्ट का खर्च स्वास्थ्य विभाग उठा रहा है। जिस घर में मरीज को काला पीलिया है वहां उस मरीज का नेलकटर, टूथब्रूश, शेविंग का सामान अलग दूसरे व्यक्तियों द्वारा प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। जो लोग नशा करते हैं वह भी एक ही सिरींज का प्रयोग करते हैं इसलिए नशे से दूर रहे हैं। टेटू भी ऐसी दुकान से बनवाएं जहां हर व्यक्ति के लिए अलग नीडल प्रयोग की जाती हो। दवा के साथ-साथ खाने-पीने का परहेज भी रखना जरूरी है। - डॉ.मनीष टुटेजा, फीजिशियन, नागरिक अस्पताल।
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