कुलां। कुलां क्षेत्र में बुधवार रात को कई गांवों में तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। लगभग एक घंटे से अधिक बारिश और कुछ मिनटों तक हुईं ओलावृष्टि से धरा ओलों की चादर से ढकी हुई थी। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। वहीं कई जगहों पर जलजमाव होने और कीचड़ की वजह से आमलोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
कुलां क्षेत्र में हुईं तेज बरसात व ओलावृष्टि से किसानों को फसलों में भारी क्षति हुई है। खेतों में गेहूं बुआई का कार्य निपटाकर अच्छी फसल की उम्मीद लगाए बैठे धरतीपुत्रों के अरमानों पर पानी फिर गया। इससे गेहूं व सब्जी की फसलों में भारी नुकसान हुआ है। इससे किसानों की फसल बुरी तरह से बिछ चुकी है। वहीं कुछ ऐसे किसान, जिन्होंने धान कटाई अभी तक नहीं की है, ओलावृष्टि के कारण उन्हें भी सीधा नुकसान हुआ है। कृषि अधिकारियों मुताबिक क्षेत्र में लगभग 85 प्रतिशत गेहूं बिजाई का कार्य मुकम्मल हो गया है, ऐसे में कुछ दिन पहले गेहूं की बिजाई कर चुके इन किसानों को क्षति पहुंची है, उन्हें यहां दोबारा बिजाई में मशक्कत करनी पड़ेगी, वहीं दोबारा से इसका खर्च उठाना पड़ेगा।
क्षेत्र के गांव भूंदडा निवासी किसान सतवीर सिंह, बिंद्र सिंह, नरेंद्र, गांधी, हरदेव सिंह व धारसूल निवासी राजेंद्र सिंह, सचिन, बलजीत, सुक्खा, राम व अन्य किसानों ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही अपने खेतों में गेहूं बिजाई की थी। जबकि बीते दिन भारी बारिश व ओलावृष्टि से ये जलमग्न हो गई है। अब उन्हें दोबारा से बिजाई करनी पड़ेगी। इससे उन्हें फिर से मेहनत करनी पड़ेगी। किसानों के मुताबिक गेहूं बिजाई में उन्हें प्रति एकड़ चार से पांच हजार रुपये अब दोबारा से खर्च करने पड़ेंगे, जो उनपर आर्थिक बोझ है।
बीमा वाले किसान विभाग को दें रिपोर्ट
खंड कृषि अधिकारी मुकेश महला ने बताया कि जिन किसानों ने बीमा कंपनी से बीमा कराया हुआ है, वे इसकी रिपोर्ट तैयार कर कृषि विभाग को प्रस्तुत करें। इस पर विभाग की ओर से बीमा कंपनी से मिलकर उक्त किसान के खेतों में सर्वे किया जाएगा। सर्वे के आधार पर ही किसानों को मुआवजा मिल सकता है।
क्या कहते है अधिकारी
ओलावृष्टि से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। हाल ही में ताजा बिजाई की गई गेहूं का तो लगभग शत प्रतिशत ही नुकसान है, वहीं जो पहले गेहूं बिजाई की गई थी और जम गई थी तो उसका भी 10 से 15 प्रतिशत नुकसान है। इसके अलावा इस ओलावृष्टि से सब्जी की फसल का भी सर्वाधिक नुकसान हुआ है।
- मुकेश महला, खंड कृषि अधिकारी टोहाना